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सुख-सौभाग्य व समृद्घि की कामना की आंवला नवमी

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जबलपुर,यभाप्र। सुख-सौभाग्य व समृद्घि की कामना के लिए शनिवार को उत्साह से आंवला नवमीं मनाई गई। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी मनाई जाती है, जिसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है। महिलाएं आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर संतान प्राप्ति और उनकी सलामती के लिए पूजा कर रही हैं। आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने का भी पुरानी परंपरा है। आंवला नवमी के दिन आंवला के वृक्ष के नीचे भोजन बनाने और भोजन करने का विशेष महत्व है। आंवला नवमी को ही भगवान विष्णु ने कुष्माण्डक दैत्य को मारा था। इस दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वन की परिक्रमा की थी। संतान प्राप्ति के लिए इस नवमी पर पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। आंवला नवमीं में इस बार पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6.35 से दोपहर 2.5 मिनट तक था। महिलाओं ने आज सुबह से ही स्नान आदि करके बाग बगीचों में मेला से लगा है। यहां स्थित आंवला वृक्ष के आसपास साफ-सफाई की फिर आंवला वृक्ष की जड़ में शुद्ध जल,कच्चा दूध अर्पित कर पूजन सामग्रियों से वृक्ष की पूजा करते और उसके तने पर कच्चा सूत या मौली 8 परिक्रमा की कुछ जगह 108 परिक्रमा भी की जाती है। इसके बाद परिवार और संतान के सुख-समृद्धि की कामना करके वृक्ष के नीचे ही बैठकर परिवार, मित्रों सहित भोजन किया । यह क्रम समाचार लिखे जाने तक जारी रहा।

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