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सी जी एच एस मरीज यानि उधार का ग्राहक, निजी अस्पतालों का सौतेलापन, प्रधानमंत्री से शिकायत

जबलपुर। सी जी एच एस लाभार्थियों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजी अस्पतालों में कैशलेस सुविधा प्रदान की है। लेकिन निजी अस्पताल स्वास्थ्य मंत्रालय के मान्यता प्राप्त करने के बाद उन शर्तों और अनुबंधों को भूल गए हैं ।जिसके आधार पर उन्हें सीजी एच एस लाभार्थियों को इलाज हेतु अधिकृत किया गया है ।कभी जांच के नाम पर तो कभी फीस के नाम पर बुजुर्ग लाभार्थियों से अनधिकृत पैसे वसूले जा रहे हैं। यहां तक कि आपातकालीन चिकित्सा के लिए भी सीजीएचएस अस्पताल से मरीजों को रेफर मंगाने हेतु दबाब डाला जा रहा है ।

अनेक बार डायरेक्टर से शिकायत करने के बाद सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री से करते हुए निजी अस्पतालों द्वारा लाभार्थियों से किए जा रहे हैं उपेक्षा पूर्ण व्यवहार और शोषण को रोकने की मांग की है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा नेबताया कि पहले निजी अस्पतालों ने लाभार्थियों की इलाज हेतु मान्यता प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों की खूब चिरोरी की, लेकिन मान्यता मिलने के बाद निजी अस्पताल शर्तों और अनुबंधों को भूल गए।

जिसके आधार पर उन्हें मान्यता मिली । अब यही निजी अस्पताल लाभार्थियों से अनाप-शनाप पैसे तो वसूलते ही हैं, साथ ही सरकार को भी लंबा चौड़ा बिल थमा कर इलाज की राशि वसूल रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर के 25 निजी अस्पतालों को मान्यता प्राप्त है ।लेकिन मरीजों को पैसे के लिए अनावश्यक तंग किया जा रहा है। इन दिनों शहर मे महामारी के रूप में चर्चित डेंगू चिकनगुनिया लंगड़ा बुखार के लिए अवैध कमाई का सिलसिला निजी अस्पताल जारी रखे है ।हाल ही में सिटी अस्पताल और साल्वी हॉस्पिटल का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कुमारी रागनी लोधी की मौत इसलिए हो गई कि सिटी हॉस्पिटल द्वारा डिस्पेंसरी से रेफर लाने की मांग की जा रही थी। जिसके चलते इलाज ना मिलने पर रागिनी की दूसरे दिन मौत हो गई ।

इसी तरह 11 सितंबर को शेल्बी अस्पताल में जहां आर के मिश्रा की माता श्रीमती उत्तरा मिश्रा को परीक्षण उपरांत डेंगू पीड़ित बताते हुए उन्हें अपनी डिस्पेंसरी से रेफर लाने के लिए कहा।रेफर के आभाव में भर्ती न करने पर उन्हें एक अन्य निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां 4 घंटे के उपरांत उनकी मौत हो गई। प्रधानमंत्री को मार्मिक पत्र लिखते हुए एसोसिएशन के सुभाष चंद्रा ने कहा कि सीजीएचएस की कैशलेस सुविधा प्राप्त बुजुर्ग लाभार्थियों को अस्पताल अनावश्यक रूप से भटकाया जा रहा हैं ।जबकि इसी योजना के तहत शासकीय सेवा में रत कर्मचारियों को जिन्हें नगद इलाज की सुविधा प्राप्त है उनका इलाज किया जा रहा है।

संवेदनहीन हो चुके निजी अस्पतालों का तर्क है कि क्रेडिट सुविधा के तहत इलाज करने में सरकार पैसा देने में आनाकानी कर महीनों उनके बिल रोक कर रखती है। लिहाजा उनके पास नगद पैसा लेने के अलावा और कोई चारा नहीं है ।प्रधानमंत्री से उन्होंने आग्रह किया है कि वह अविलंब इस मामले में हस्तक्षेप कर बुजुर्ग लाभार्थियों को अस्पतालों के सौतेले व्यवहार से मुक्ति दिलाते हुए निर्बाध केश लेश इलाज दिलायें अन्यथा एसोसिएशन अदालत की शरण लेगा।

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