नई दिल्ली। दिल की बीमारी के इलाज में काम आने वाले स्टेंट के दामों में कुछ बदलाव हुए हैं। कोरनेरी स्टेंट की कीमतों में 85 प्रतिशत तक की भारी कमी करने के लगभग एक साल बाद सरकार ने इसके दामों में बदलाव किया है।
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ( NPPA ) ने मेडिकल में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट्स के दाम और कम कर दिए हैं। हालांकि दूसरी तरफ बिना दवा लगे मेटल स्टेंट्स के दाम कुछ बढ़ा दिए गए हैं। अथॉरिटी ने एंजियोग्राफी प्रोसिजर में इस्तेमाल होने वाले दूसरे उपकरणों पर मार्जिन का हवाला देते हुए कहा कि कार्डियक कैथेटर, गाइड वायर और बैलून कैथेटर के दाम बिल में अलग से लिखे जाने चाहिए।
बता दें कि कोरोनरी स्टेंट दिल के दौरे की बीमारी के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। यह पतला तार सरीखा ट्यूब होता है, जिन्हें ब्लॉकेज हटाने के लिए दिल की धमनियों में पहुंचाया जाता है ताकि दिल के दौरे का खतरा कम किया जा सके।
सरकार ने सोमवार को बेअर मेटल स्टेंट (बीएमएस) के दाम 7400 रपए से ब़़ढाकर 7600 रपए कर दिए हैं। दूसरी ओर ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट की कीमत 30,180 रपए से घटाकर 27,890 रपए कर दी है। नेशनल फामॉस्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी की अधिसूचना के मुताबिक संशोधित दाम मंगलवार से प्रभावी हो जाएंगे और ये 31 मार्च 2019 तक लागू रहेंगे।
कुछ स्टेंटमेकर्स को निराश कर सकने वाले एक कदम में रेगुलेटर ने तय किया है कि नए लॉन्च किए गए ड्रग इलूटिंग स्टेंट्स के लिए नई सब-कैटेगरी नहीं बनाई जाएगी। एनपीपीए के नोटिफिकेशन में कहा गया कि इस अनुरोध पर विचार करने के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की ओर से विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई थी। जिन्होनें इस पर अलग सब-कैटेगरी बनाने का कोई आधार नहीं पाया क्योंकि एक डीईएस के दूसरे से बेहतर होने का पर्याप्त क्लिनिकल एविडेंस नहीं है। मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल पवन चौधरी ने कहा कि यह निर्णय निराशाजनक है और इससे मरीज के सामने विकल्प सीमित हो जाएंगे और मार्केट में इनोवेटिव टेक्नोलॉजी की उपलब्धता भी घटेगी।
पेशेंट एक्टिविस्ट ग्रुप ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क की मालिनी ऐसोला ने कहा, ‘इन उपकरणों को भी प्राइस कंट्रोल के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राम जैसे प्रोसिजर की लागत कम हो।’ नोटिफिकेशन में कहा गया कि 12 फरवरी को एनपीपीए की मीटिंग में यह आमराय बनी कि कार्डियक स्टेंट्स को ‘जनहित’ में प्राइस रेगुलेशन के दायरे में बनाए रखा जाना चाहिए।
