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समय से 3 दिन पहले 29 मई को केरल पहुंचेगा मानसून फिर 15 दिन में देशभर में दस्तक

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नई दिल्ली. मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 दिन पहले यानी 29 मई को केरल से टकरा सकता है। अमूमन मानसून 1 जून को यहां पहुंचता है। विभाग के मुताबिक, जुलाई तक मानसून पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। स्काईमेट ने 28 मई को मानसून के केरल पहुंचने का अनुमान जाहिर किया था। इससे पहले मौसम विभाग मानसून के सामान्य रहने की बात कह चुका है। जून से सितंबर के दौरान 97% बारिश की उम्मीद है।

15 दिनों में आधे देश में दस्तक देगा मानसून

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मौसम विभाग ने बताया- इस वर्ष देश में मानसून की स्थिति सामान्य है। शुरुआती 15 दिनों में देश के आधे हिस्से पर और जुलाई के मध्य तक पूरे देश को मानसून कवर कर लेगा। देश के मध्य हिस्सों में जून के तीसरे सप्ताह तक मानसून पहुंच जाएगा। वहीं, जुलाई के पहले सप्ताह तक पश्चिमी हिस्सों को भी कवर कर लेने का अनुमान है।

मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश में मानसून 13 जून या उसके आसपास आ सकता है। उन्होंने बताया कि चार हफ्ते के लिए जारी इस फोरकास्ट में कहा गया है कि दूसरे हफ्ते में बंगाल की खाड़ी में दक्षिण-पश्चिमी मानसून सक्रिय रह सकता है। 15 मई के पास मानसून अंडमान निकोबार आ सकता है। तीसरे और चौथे हफ्ते में अरब सागर में मानसून में होने वाले सर्कुलेशन देखे जाने के आसार हैं।

दक्षिण-पश्चिम मानसून अंडमान से 20 मई को शुरू होगा। इसमें 1 हफ्ते का बदलाव भी हो सकता है।

4 महीने के मानसून से 70% पानी मिलता है

मानसून जून से सितंबर के बीच चार महीने का माना जाता है। देश में जब 96% से 104% के बीच बारिश होती है तो उसे सामान्य मानसून कहा जाता है। देश में हर साल औसतन 887.5 मिमी बारिश होती है।
ये चार महीने इसलिए अहम माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान बरसने वाला पानी देश की सालभर की बारिश में 70% योगदान देता है।

– – मौसम विभाग 2005 से लगातार केरल में मानसून के आधार पर अनुमान जारी करता है। केवल 2015 को छोड़कर हरसाल यह अनुमान सही होता है।

पिछले 5 साल में अनुमान क्या था, असल में कितनी बारिश हुई

 

साल मौसम विभाग का अनुमान स्काईमेट का अनुमान वास्तविक बारिश
2013 98% 103% 106%
2014 96% 94% 88%
2015 93% 102% 86%
2016 106% 105% 97%
2017 98% 95% 95%

 

देश की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है मानसून

भारत में मानूसनी बारिश देश की अर्थव्यवस्था की लाइफ लाइन है। 70 फीसदी सिंचाई की जरूरतों को पूरा करती है। देश में करीब आधी कृषि भूमि जून-सितंबर के मानसून पर ही निर्भर है। सामान्य मानसून की बदौलत एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्थ्या भारत में उच्च कृषि उत्पादकता और अार्थिक गति में तेजी की भी उम्मीद है

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