Site icon Yashbharat.com

शरीयत कानून में भी तलाक-ए-बिद्दत वैध नहीं

images 81

वेब डेस्क। शरीयत कानून (मुस्लिम पर्सनल लॉ) के तहत सिर्फ तीन तलाक कहकर पत्नी से अलग होने का फैसला लेना वैध नहीं है। इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। अमूमन शरीयत कानून की जानकारी ना होने के कारण विशेष समुदाय के लोग तीन तलाक बोलकर पत्नी को त्यागने का निर्णय करते हैं, जो कि गैरकानूनी है। अदालत ने यह टिप्पणी एक युवक की तीन तलाक को मंजूर करने संबंधी याचिका को खारिज करते हुए की।

रोहिणी स्थित फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज डॉ. सुधीर कुमार जैन की अदालत ने शरीयत कानून का हवाला देते हुए तीन तलाक की याचिका को नामंजूर किया है। अदालत ने अपने फैसले में शरीयत कानून की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि बेशक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक पुरुष को तलाक-ए-बिद्दत(तीन तलाक) के तहत पत्नी से अलग होने का अधिकार दिया गया है। मगर इसके लिए भी इस पुरुष (पति) को एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

किसी एक कड़ी की कमी की वजह से यह तलाक मुक्कमल नहीं माना जाता। अदालत ने यह भी कहा कि शरीयत की पूरी जानकारी ना होने के कारण तलाक-ए-बिद्दत जैसे अधिकार का दुरुपयोग होता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। तलाक-ए-बिद्दत की एक भी शर्त को पूरा नहीं किया गया और पत्नी से छुटकारा पा लिया गया।

Exit mobile version