विवाद पर वीवीपैट पर्चियों की गिनती से होगा फैसला
भोपाल। लोकसभा चुनाव के नतीजों के लिए इस बार रातभर का इंतजार करना पड़ सकता है। मतगणना को लेकर विवाद की स्थिति में वीवीपैट की पर्ची के परिणाम को ही अंतिम माना जाएगा। इसके आधार पर ही परिणाम घोषित किए जाएंगे। वहीं भोपाल, इंदौर सहित अधिकांश लोकसभा चुनाव के परिणाम शुक्रवार सुबह तक आने की संभावना है।
इसकी वजह गणना के चक्र अधिक होने, हर चक्र के नतीजे घोषित करने से पहले चुनाव आयोग को भेजने, उम्मीदवारों को प्रमाणित प्रति देने, वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम से मिलान करने सहित अन्य प्रक्रियाओं में वक्त लगना है। रात दस बजे के आसपास पहला परिणाम आ सकता है। सबसे पहले मतगणना कटनी जिले में पूरी होगी, क्योंकि यहां 21 टेबलों पर गणना होगी।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश लोकसभा सीटों के मतों की गणना 19-20 चक्र होगी। गणना के लिए 14-14 टेबल लगाई गई हैं। सबसे ज्यादा 29 चक्र गणना इंदौर-पांच विधानसभा में होगी।
इंदौर लोकसभा में एकमात्र इंदौर-तीन सीट ऐसी है, जहां 16 चक्र मत गिने जाएंगे। बाकी विधानसभा क्षेत्रों में 20 से ज्यादा चक्र मतगणना होगी। इसी तरह भोपाल में गोविंदपुरा विधानसभा में 28, हुजूर में 27, बैरसिया और सीहोर में 19-19 चक्र में मत गिने जाएंगे। बाकी विधानसभा में 20 से ज्यादा चक्र गिनती होगी। कमोबेश यही स्थिति ग्वालियर में भी है।
जबलपुर में पाटन, बरगी, जबलपुर पश्चिम और सीहोरा को छोड़कर शेष विधानसभा में 20 से कम चक्र गिनती चलेगी। हर चक्र की गिनती के बाद गणना एजेंटे को गणना पत्रक दिया जाएगा। इसकी फोटो कॉपी करके सभी प्रत्याशियों के एजेंटों को दी जाएगी। वहीं, जब दूसरे जिलों के मतगणना केंद्रों से नतीजे आ जाएंगे, तब रिटर्निंग ऑफिसर अंतिम प्रपत्र तैयार करके चुनाव आयोग के सुविधा पोर्टल पर अपलोड करेगा और फिर परिणाम की घोषणा की जाएगी।
इस प्रक्रिया में समय लगेगा। इसके साथ ही जिन सीटों पर 15 से ज्यादा उम्मीदवार होने से दो बैलेट यूनिट का उपयोग करना पड़ा, वहां गिनती में समय लगेगा। इस बार प्रत्येक विधानसभा के पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का मिलान ईवीएम से किया जाना है।
इसके लिए पर्चियों के बंडल बनाकर जमाए जाएंगे और एक-एक वीवीपैट की पर्चियों की गणना करके ईवीएम से मिलान होगा। इसके पहले उन ईवीएम में दर्ज वोट गिने जाएंगे, जो मतगणना के दौरान शुरू नहीं हो पाएंगी।
इस प्रक्रिया में तीन से पांच घंटे तक लग सकते हैं। दरअसल, कई बार क्लोज, रिजल्ट और क्लीयर की बटन दबाना पीठासीन अधिकारी भूल जाते हैं। इसकी वजह से मशीन काम करना ही शुरू नहीं करती है। विधानसभा चुनाव के वक्त भी कुछ इस तरह की मशीनों की वजह से मतगणना में परेशानी हुई थी। इसके अलावा शिकवा-शिकायतों के निराकरण में भी समय लगने की संभावना है।

