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मोदी सरकार को खोलना पड़ेगा खजाना, हर घर में नल से जल का प्रस्ताव

11 06 2019 waterfromtap11 19304037 23738804 m

नई दिल्ली। हर घर को नल से जल मुहैया कराने के लिए मोदी सरकार को खजाना खोलना पड़ेगा। राज्य सरकारें केंद्र के प्रस्तावित ‘जल जीवन मिशन’ से पर्याप्त सहायता राशि मिलने की उम्मीद लगाए बैठीं हैं।

सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में पेयजल आपूर्ति के मुद्दे पर हुई बैठक में राज्यों ने जिस तरह पेयजल के लिए धनराशि की जरूरत बतायी है, उससे स्पष्ट है कि केंद्र को आगामी वर्षो में इसके लिए खासा बजट आवंटित करना पड़ेगा। अकेले उत्तर प्रदेश को ही नल से जल मुहैया कराने के लिए अगले पांच साल में कम से कम 1.20 लाख करोड़ रुपये की दरकार होगी।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. महेन्द्र सिंह ने मंगलवार को इस बैठक में राज्य के लिए पेयजल पैकेज दिये जाने की मांग भी की है। इसमें से 212 करोड़ रुपये आर्सेनिक प्रभावित बस्तियों और 414 करोड़ रुपये फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों के लिये शामिल हैं। इसमें जापानी एंसेफलाइट्स से प्रभावित क्षेत्रों के लिये 1470 करोड़ रुपये तथा बुंदेलखंड में पेयजल मुहैया कराने की योजनाओं के लिए जरूरी धन भी इसमें शामिल है। राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में ही 35,000 करोड़ रुपये की योजनाओं का डीपीआर तैयार कर लिया है।

सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने भी केंद्र से वित्तीय मदद की मांग की। बहरहाल किस राज्य को कितनी राशि मिलेगी इसका पता नल से जल पहुंचाने के ‘जल जीवन मिशन’ की रूपरेखा तय होने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल मंत्रालय इस कार्यक्रम का खाका तैयार कर रहा है। जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिये भेजा जाएगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि इस योजना में केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी कितनी रहेगी और किस प्रदेश को कितनी राशि मिलेगी।

सूत्रों ने कहा कि राज्यों की मांग काफी हद तक जायज है क्योंकि सबको स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए न वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने के लिये भारी राशि की दरकार होगी बल्कि जल के भंडारण और उसे स्वच्छ बनाने के लिये भी वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।

सूत्रों ने कहा कि सभी राज्यों ने बैठक में अपने-अपने प्रतिनिधि भेजे, लेकिन बंगाल से न तो कोई मंत्री और न ही कोई अधिकारी बैठक में शामिल हुआ। सूत्रों ने कहा कि बंगाल के इस रुख के चलते जल की कई परियोजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।

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