दो माह पहले किशोरी ने घर से भागने की कोशिश की थी, लेकिन तब समय रहते जानकारी मिल जाने के कारण वह शहर से बाहर नहीं निकल सकी थी। तब भी उसकी काउंसलिंग की गई थी। कुछ दिनों तक तो वह ठीक रही, लेकिन हाल ही में वह फिर घर छोड़ने की योजना बनाने में लग गई। संदेह होने पर उसके दादा ने चाइल्ड लाइन से संपर्क किया।

चाइल्ड लाइन की टीम ने जब पड़ताल की तो दादा का शक सौ फीसद सच निकला। छात्रा के अकाउंट में उसके मिर्जापुर वाले दोस्त ने पांच हजार रुपये भेजे थे। ट्रेन से सफर के लिए उसके टिकट का भी इंतजाम कर दिया गया था। दादा की सर्तकता से छात्रा, युवक के चंगुल में फंसने से बच गई है।

दो माह पहले किशोरी ने घर से भागने की कोशिश की थी, लेकिन तब समय रहते जानकारी मिल जाने के कारण वह शहर से बाहर नहीं निकल सकी थी। तब भी उसकी काउंसलिंग की गई थी।

कुछ दिनों तक तो वह ठीक रही, लेकिन हाल ही में वह फिर घर छोड़ने की योजना बनाने में लग गई। संदेह होने पर उसके दादा ने चाइल्ड लाइन से संपर्क किया। चाइल्ड लाइन की टीम ने जब पड़ताल की तो दादा का शक सौ फीसद सच निकला।

छात्रा के अकाउंट में उसके मिर्जापुर वाले दोस्त ने पांच हजार रुपये भेजे थे। ट्रेन से सफर के लिए उसके टिकट का भी इंतजाम कर दिया गया था। दादा की सर्तकता से छात्रा, युवक के चंगुल में फंसने से बच गई है।