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महिलाएं संभालेगी मीटर रीडिंग, बिल बांटने और बकाया वसूलने का काम

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 बड़वानी। अब देहात व शहर के स्लम इलाकों में बिजली की मीटर रीडिंग, बिल बांटने और बकाया राशि की वसूली आदि के काम में पंकज, सुरेश या इकबाल की जगह आपको रेशमा, सरिता या सावित्री आदि दिखाई देगी।

मप्र में पहली बार जल्द ही इस तरह का प्रयोग पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर करने का जा रही है। पहले चरण में हर जिले के दो केंद्रों और कंपनी क्षेत्र के तीस केंद्रों का जिम्मा नारी शक्ति यानि स्व सहायत समूह (एसएचजी) की महिलाओं को दिया जाएगा।

विविकं अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री पारसचंद्र जैन ने बिजली मित्र योजना के माध्यम से देहात व स्लम इलाकों में व्यवस्था चलाने और इन इलाकों में बिजली सेवा और वसूली में बेहतरी के लिए कहा था।

इस पर इंदौर बिजली कंपनी के एमडी आकाश त्रिपाठी ने सभी पंद्रह जिलों इंदौर, धार, आलीराजपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, झाबुआ, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, आगर, नीमच व देवास के अधीक्षण यंत्रियों को बिजली मित्र योजना के माध्यम से स्व सहायता समूह की चुुनिंदा महिलाओं या फिर पूरे समूह को जोड़कर क्षेत्र विशेष की बिजली व्यवस्था का काम सौंपने के निर्देश दिए हैं।

संभवत: नवंबर माह से इस कार्य के अमल में महिलाओं की बिजली मामलों में घर-घर विधिवत आमद भी प्रारंभ हो जाएगी।

चोरी भी रूकेगी, वसूली बढ़ेगी

बिजली कंपनी का मानना है कि महिलाएं कई क्षेत्रों में पुरूषों के बेहतर काम कर रही है। स्व सहायता समूहों में एकता व मदद के साथ महिलाएं बेहतर काम कर रही हैं। महिलाएं जब गांव या स्लम इलाके में जाएगी तो बिजली चोरी न करने की अपील भी करेगी। स्थानीय महिला होने से अपील का प्रभाव भी ज्यादा होगा। वहीं रूकी हुई वसूली भी प्रभावी ढंग से हो सकेगी। इसके एवज में कंपनी एक निश्चित मानदेय महिलाओं को देगी।

बढ़ा सकते हैं दायरा

विविकं के अधीक्षण यंत्री अनिल नेगी ने बताया कि बिजली मित्र योजना का दायरा तय नहीं है। यदि बेहतर परिणाम मिलते हैं तो इसका दायरा बढ़ाया भी जा सकता है। वहीं अब तक देखने में आया है कि महिलाएं किसी भी काम को बहुत बेतहर तरीके से अंजाम देती हैं, इसलिए इस योजना से बहुत उम्मीद है।

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