महाकाल मंदिर का ऑफिस बदला, चर्चा… वास्तु दोष का डर

उज्जैन। सिंहस्थ से पूर्व महाकाल मंदिर कार्यालय को नए भवन में शिफ्ट किया था। हालांकि इस भवन को रविवार को ताबड़तोड़ खाली कर दिया गया। दफ्तर को पास ही बने पुराने प्रसूतिगृह भवन में शिफ्ट किया गया है। अफसर इसे व्यवस्थागत तब्दीली बता रहे हैं, हालांकि मंदिर में चर्चा है कि वास्तुदोष और अपशकुन की आशंका के चलते ऐसा किया है। पुजारियों ने इसकी सलाह दी थी। अफसर इसे लेकर खुलकर बोलने से बच रहे हैं।

कार्य व्यवस्था की दृष्टि से सिंहस्थ से पूर्व दो करोड़ रुपए खर्च कर नया कार्यालय भवन प्रसूतिगृह के पास बनाया गया था। इसकी साज-सज्जा पर भी लाखों रुपए खर्च किए गए। यह पूर्व कार्यालय की तुलना में बड़ा और व्यवस्थित भी है। हालांकि इसे ताबड़तोड़ खाली किया गया है। अब कर्मचारी समीप बने प्रसूतिगृह भवन में बैठकर काम करेंगे। वहीं प्रशासक मंदिर में बने पुराने प्रशासक कार्यालय में बैठेंगे। इस बदलाव को लेकर मंदिर में खासी चर्चा है।

कर्मचारियों ने दबी जुबान बताया कि अफसरों ने वास्तुदोष और अपशकुन के डर के चलते यह निर्णय लिया है। दरअसल, जब से नया कार्यालय भवन बना है, लगातार प्रशासक बदलते जा रहे हैं। पूर्व प्रशासक आरपी तिवारी को छोड़कर एक भी प्रशासक अकि समय तक कुर्सी पर नहीं बैठ पाए। सूत्रों के अनुसार इसे लेकर पुजारियों से राय ली गई थी। उनकी सलाह पर कार्यालय शिफ्ट किया है। नए भवन का अब क्या उपयोग होगा, यह अभी तय नहीं है।

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