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मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने की जबलपुर की तारीफ

pm modi mirzapur 2018715 101936 15 07 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपनी मन की बात में मध्यप्रदेश के संस्कारधानी के रुप में पहचानूे जाने वाले जबलपुर शहर व उसके लोगों की स्वच्छता में योगदान के लिए जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस शहर में एक साथ तीन लाख से ज्यादा लोग सफाई अभियान में जुटे। स्वच्छता के इस महायज्ञ में नगर निगम, स्वयं सेवी संगठन, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, जबलपुर की जनता-जनार्दन, सभी ने बढ़-चढ़ करके भाग लिया। इसी तरह से अन्य शहरों के लोगों को भी जागरुक होकर इस अभियान में अपना योगदान देना चाहिए। अपने उद्बोधन में कहा कि इस बार कुंभ में स्वच्छता पर भी खास ध्यान दिया जाएगा एवं श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के बाद अब सैंकड़ों वर्षों से किले में बंद अक्षयवट के पुण्य दर्शन भी कर सकेंगे। मेरा आप सब से आग्रह है कि आप जब कुंभ जाएं तो कुंभ के अलग-अलग पहलू और तस्वीरें सोशल मीडिया पर अवश्य शेयर करें ताकि अधिक-से-अधिक लोगों को कुंभ में जाने की प्रेरणा मिले। प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों को आने वाले त्योहारों एवं नए साल की शुभकामनाएं देते हुए आग्रह किया कि उत्सवों पर ली गई तस्वीरों को सबके साथ शेयर करें ताकि भारत की विविधता और भारतीय संस्कृति की सुन्दरता को हर कोई देख सके।
प्रधानमंत्री ने त्योहारों पर आधारित कैलेंडर की चर्चा करते हुए कहा चन्द्रमा और सूर्य की गति पर आधारित, चन्द्र और सूर्य कैलेंडर के अनुसार पर्व और त्योहारों की तिथि निर्धारित होती है व कई क्षेत्रों में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार भी त्योहार मनाये जाते हैं। हमारे त्योहार हमें नदियों एवं जल का संरक्षण करने की ओर अग्रसर करते हैं और छठ एवं मकर संक्रान्ति जैसे पर्व हमें सूर्य की उपासना व सामाजिक मूल्यों की शिक्षा भी देते हैं। प्रधानमंत्री ने किसानों को त्योहारों की बधाई दी एवं ‘विविधता में एकताÓ तथा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारतÓ का जिक्र करते हुए कहा कि भारतवर्ष के पर्व प्रकृति से कितनी निकटता से जुड़े हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने जनवरी में त्योहारों के आगमन पर हर्षोउल्लास प्रकट करते हुए कहा कि भारत के पर्व अपनी विविधताओं से सभी देशवासियों को एक साथ ले आते हैं और अलग होते हुए भी सभी इनको धूम-धाम से मिलकर मनाते हैं। लोहड़ी, पोंगल, मकर संक्रान्ति, उत्तरायण, माघ बिहु, माघी, इन त्योहारों के अवसर पर पूरे भारत में कहीं पारंपरिक नृत्यों का रंग दिखेगा, तो कहीं फसल तैयार होने की खुशियों में लोहड़ी जलाई जाएगी, कहीं पर आसमान में रंग-बिरंगी पतंगे उड़ती हुई दिखेंगी, तो कहीं मेले की छठा बिखरेगी।

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