मंगोलिया बॉर्डर फोर्स के अफसर यहां में ले रहे स्नाइपर ट्रेनिंग

इंदौर। सांवेर रोड स्थित रेवती रेंज की पहाड़ियां इन दिनों युद्धाभ्यास का केंद्र हैं। सबसे कठिन स्नाइपर ट्रेनिंग का स्थल। दुश्मन की नजरों से बचकर दुश्मन को मार गिराने का अभ्यास स्थल। इस ट्रेनिंग का हिस्सा हैं मंगोलिया से आए जनरल अथॉरिटी ऑन बॉर्डर प्रोटक्शन के 10 अफसर। ट्रेनिंग 12 फरवरी से शुरू है और 22 तक चलेगी।
सेंट्रल स्कूल्स ऑफ वेपंस एंड टैकटिक्स के तहत पैरा मिलिट्री फोर्स व पुलिस को ट्रेनिंग देने में अव्वल मानी जाने वाली इंदौर बीएसएफ का दावा है कि मित्र देशों को दिया जा रहा स्नाइपर्स ट्रेनिंग को पहली बार सार्वजनिक किया जा रहा है। स्नाइपर्स इन दिनों इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जम्मू कश्मीर में भारत-पाक के बीच चल रहे मुठभेड़ में दोनों सेनाएं इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही हैं।
बीएसएफ सेंकंड इन कमांड और पीआरओ बीके सिंह के मुताबिक किसी भी स्नाइपर्स के लिए अपनी सांसें, चाल, आकार, नजर, आभास, आकलन और आक्रमण पर पूर-पूरा नियंत्रण बहुत जरूरी है। क्योंकि इसमें एक बार गोली चल गई और निशाना चूक गया तो दूसरा मौका नहीं मिलता है। या तो मौत या युद्ध बंदी। स्नाइपर्स दो तरह के होते हैं-पहले कन्वेंशनल, जो युद्ध और सीमाओं के लिए तैयार होते हैं। दूसरे अर्बन, जो शहरी इलाकों में घुस आए आंतकियों को टारगेट करते हैं या वीवीआईपी मूवमेंट पर नजर रखते हैं।

10 मीटर के दायरे में पहला टारगेट चूका : लाइव ट्रेनिंग के दौरान मंगोलियन टीम को एक किमी की दूरी और 10 मीटर चौड़ाई में स्नाइपर्स को तलाशने का टारगेट दिया गया। पहला टारगेट तो चूक गए, लेकिन दूसरा ढूंढ निकाला।
सीमा पर तस्करी रोकना मुख्य उद्देश्य
मंगोलियन मुख्य रूप से युद्ध कौशल में माहिर होते हैं। तेज गर्मी से लेकर मायनस 40 डिग्री तापमान तक के वातावरण में रहने वाले इन जवानों को इंदौर का मौसम सबसे ज्यादा आरामदायक लग रहा है। साउथ बॉर्डर एरिया के लेफ्टिनेंट कर्नल इंखजारगल और जूनियर सार्जन्ट बथटॉर्ज के मुताबिक मंगोलिया में आंतकवाद की समस्या तो नहीं है, लेकिन सीमा पर होने वाली तस्करी को रोकने के लिए यह ट्रेनिंग कारगर साबित होगी।
छह देशों को युद्ध व हथियारों की ट्रेनिंग बीएसएफ द्वारा अब तक बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नोपाल, भूटान, मालद्वीप, मंगोलिया के 274 जवानों को युद्ध कौशल की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। भारत की पैरा मिलट्री फोर्स, पुलिस के हजारों जवान भी यहां अलगअलग विधाओं में ट्रेनिंग ले चुके हैं।
सांप खाने की भी ट्रेनिंग
स्नाइपर्स को जंगल में खाने की ऐसी चीजें तलाशने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जो बिना पकाए खा सकें। जैसे, लाल दिखने वाली चीजें न खाएं, चौड़े पत्ते खाएं, पहला स्वाद तीखा तो उसे छोड़ दें। सांप के जहर की ग्रंथि वाले आगे का हिस्सा काटकर पिछला हिस्सा खाएं।








