बैंकों के निजीकरण का अगला चरण: 4 सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी घटाने की तैयारी, देश में बचेंगे सिर्फ 3-4 बड़े PSU बैंक
नई दिल्ली: देश के बैंकिंग सेक्टर में बड़े रीस्ट्रक्चरिंग और निजीकरण (Privatisation) को लेकर केंद्र सरकार एक और बड़े कदम की ओर आगे बढ़ रही है। सरकार चार प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks)—सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB)—में अपनी हिस्सेदारी कम करने पर विचार कर रही है।
सेबी (SEBI) के नियमों को पूरा करने की कवायद
शेयर बाजार नियामक सेबी के नियमों के अनुसार, लिस्टेड कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक (पब्लिक) होनी चाहिए। सरकार इन चारों बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 75 प्रतिशत तक लाने की रणनीति बना रही है, जिससे शेयर बाजार में आम निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी।
दो और बैंकों के निजीकरण की तैयारी
सरकार की दीर्घकालिक (Long Term) रणनीति देश में सिर्फ 3 से 4 प्रमुख और बड़े सरकारी बैंक बनाए रखने की है।
सूत्रों के अनुसार, मर्जर (विलय) और रीस्ट्रक्चरिंग के तहत दो और सरकारी बैंकों को निजीकरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है। नीति आयोग पहले ही सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के निजीकरण की सिफारिश कर चुका है। कनाडाई-भारतीय अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) ने IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए बोली लगाई है।
बजट 2021-22 के वादे को आगे बढ़ाने की योजना
सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में IDBI बैंक के अलावा दो सार्वजनिक बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण का ऐलान किया था। इस नए कदम से न सिर्फ सरकार को पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी, बल्कि सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।











