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बुजुर्ग पेंशनों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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जबलपुर। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय के तहत संचालित (केन्द्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना) सीजीएचएस लाभार्थियों के हित में सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग पेंशनरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बड़ी राहत दी है।

बगैर मान्यता प्राप्त अस्पताल से ले सकते हैं इलाज
साथ ही मेडिकल रिएम्बर्समेंंट बिल भुगतान एक माह में सुनिश्चित हो

जिसके तहत अब पेंशन अथिवा सेवा में रत सीजीएचएस के लाभार्थी विभाग के तहत नामांकित अस्पतालों के अतिरिक्त बिना मान्यता प्राप्त अस्पतालों से अपना इलाज करा सकते हैं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से इस योजना से जुड़े 44 लाख लाभार्थियों को लाभ मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट की बैच के माननीय न्यायाधीश आर के अग्रवाल एवं अशोक भूषण ने अपने फैसले में कहा कि यह महत्वपूर्ण नहीं है सीजीएचएस के तहत किन अस्पतालों को मान्यता दी गई है और उनके चिकित्सा की फीस कितनी है सवाल बुजुर्ग पेंशनर की जिंदगी का है कि वह किस तरह स्वस्थ्य हों संविधान उसे जीने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।

बैच ने अपने फैसले में उम्र के आखिरी पड़ाव में जब उसकी आय कम हो गई है, पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं ऐसे में उसको नियमों की बेड़ियों में नहीं बांधा जा सकता है और उसके द्वारा इलाज में किये गये भुगतान को रिएम्बर्समेंंट से वंचित नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की माननीय बैच ने उक्त ऐतिहासिक फैसला शिवाकांत झा के वाद पर दिया था जिन्होंने आपात स्थिति में हृदय के इलाज में दिल्ली के एस्कार्ट और मुंबई के जसलोक अस्पताल में इलाज कराया था। लेकिन उनके बिल को यह कहते हुए वापस कर दिया कि वे अस्पताल जीसीएचएस में सूचीबद्घ नहीं है। इस पर बैच ने कहा कि भले ही उक्त अस्पताल सूचीबद्घ नहीं है। लेकिन इलाज करने वाले विशेषज्ञों के अकादमिक ज्ञान और उनके चिकित्सा अनुभव को नकारा नहीं जा सकता है और न ही यह कहा जा सकता है कि उन्होंने उचित इलाज नहीं किया है। बैच ने निदेशक सीजीएचएस को निर्देश दिये कि वह एक विशेषज्ञ समिति बनाये जो इन बिलों की जांच कर उनका निराकरण एक माह के भीतर इलाज राशि भुगतान सुनिश्चित

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