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प्रचार सामग्री पर महंगाई का तड़का

इस बार प्रचार सामग्री की कीमतों में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनावों की अपेक्षा 10 प्रतिशत तक उछाल आया है। इसके अलावा 18 प्रतिशत जीएसटी की मार पर भी भारी पड़ रही है। बीते चुनावों की अपेक्षा इस बार प्रचार सामग्री के ट्रेंड में बदलाव आया है।
पूरा काम टोपी और मफलर से
झंडे-बैनर की जगह इस बार पूरा काम टोपी और मफलर से हो रहा है। आयोग ने प्रत्याशियों के प्रचार से जुड़ी हर गतिविधि के लिए रेट तय कर रखे हैं। आमतौर पर पार्टियां और प्रत्याशी झंडे बैनर, पोस्टर के जरिए अपना प्रचार करती हैं। ये तरीका एक तरह से चुनाव चिन्ह को बताने का होता है। लेकिन इस बार प्रत्याशी समर्थकों को टोपी, मफलर और बैंड पहना रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्रत्याशी को इसमें खर्च कम आता है और प्रचार अधिक होता है। डिमांड बढऩे से चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वाले भी झंडे बैनर से ज्यादा टोपी और मफलर अधिक मंगवा रहे हैं।
कम खर्च में ज्यादा प्रचार
प्रत्याशियों को टोपी, मफलर, बैंड से दूसरे तरीकों से ज्यादा असरदार लग रहा है। प्रचार सामग्री विक्रेता की मानें तो प्रत्याशी को ये सस्ते पड़ते हैं। टोपी और मफलर का उपयोग कितने समर्थक कर रहे हैं, इसे कम संख्या दिखा देते हैं। इसके अलावा इस सामग्री को समर्थक गली-मोहल्ले में पहनकर घूमते हैं जिससे ज्यादा प्रचार होता है। वहीं झंडे-बैनर एक जगह लग जाते हैं, जिससे प्रचार सीमित क्षेत्र में हो पाता है।
हर चीज का अलग-अलग रेट चार्ट
प्रत्याशी के लिए खर्च तय में उनके और समर्थकों के चाय-नाश्ता से लेकर मंच, झंडे, बैनर, गाड़ी, कुर्सी-टेबल, माइक, पेट्रोल हर चीज का अलग-अलग रेट चार्ट आयोग ने बना रखा है। जिसके हिसाब से खर्च का आकलन होता है। एक चाय का 5 रुपए खर्च जुड़ता है। यही वजह है कि प्रचार के वक्त प्रत्याशी चाय-नाश्ते से परहेज करते हैं, क्योंकि प्रचार के वक्त किसी समर्थक या मतदाता ने भी चाय-नाश्ते का ऑफर किया तो वो भी प्रत्याशी के खर्च में जुड़ जाएगा। सभा में लगने वाली कुर्सी का 9 रुपए प्रति कुर्सी कवर के साथ खर्च जोड़ा जाता है।
मॉनीटरिंग भी की जा रही
प्रत्याशियों व पार्टी प्रतिनिधियों को निर्वाचन कार्यालय के चुनावी कंट्रोल रूम, प्रेक्षकों के फोन नंबर व उनसे मिलने का समय भी बताया। वोटर्स को प्रलोभन देना, सामग्री वितरण आदि से दूर रहने की सलाह दी गई। क्योंकि सभी प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार व अन्य कार्यो की मॉनीटरिंग भी की जा रही है।
हिसाब-किताब के लिए सीए तैनात

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