Shri Harihar Tirth तीर्थ में भगवान की प्रतिमा स्थापित होने सामान्य है किंतु भक्त की प्रतिमा यह अनूठा और भगवान के प्रति सच्चे श्रद्धा भाव को प्रगट करता है। हरिहर तीर्थ में माता शबरी के मंदिर निर्माण के संकल्प को जब मैने पढ़ा तो अचंभित थी।
यह विचार श्री हरिहर तीर्थ में पहुंचीं देश की प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भक्त शबरी का जो प्रसंग रामायण में है वह अद्भुद है। हम रामायण पाठ करते हैं शबरी माता के इस प्रसंग को पढ़ते हैं फिर आगे बढ़ जाते हैं जबकि यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रसंग है।
मालिनी अवस्थी ने कहा कि सबरी के भक्ति भाव से यह प्रेरणा मिलती है कि भगवान सिर्फ प्रेमभाव के भूखे हैं। फिर वह सबरी की कुटिया ही क्यों न हो उनके जूठे बेर ही क्यों न हों यह हमें सिखाता है कि आतिथ्य का भाव होना जरूरी है अतिथि के रूप में भगवान कब आ जाएं।
मालिनी अवस्थी ने हरिहर तीर्थ के निर्माण के संकल्प के लिए संजय पाठक की प्रशंसा की साथ ही विजयराघवगढ़ की जनता को भी भाग्यशाली बताया जो उन्हें इस तीर्थ में वास करने का अवसर मिल रहा। पद्मभूषण मालिनी अवस्थी ने लोकगीत से माहौल को राम मय बना दिया। जगतगुरु ने भी एक चौपाई से सबरी के महत्व को बता कर सभी को भावुक होने पर विवश कर दिया गुरुवर ने मालिनी दीदी की प्रशंसा की।
आपको बता दें कि मालिनी अवस्थी एक भारतीय लोक गायिका हैं। वह हिन्दी भाषा की बोलियों जैसे अवधी, बुंदेली भाषा और भोजपुरी में गाती हैं। वह ठुमरी और कजरी में भी प्रस्तुत करती हैं। भारत सरकार ने उन्हें नागरिक सम्मान पद्म श्री से 2016 में सम्मानित किया।

