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निजी स्कूलों में लटके ताले, इस वजह से सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

school gate Locked

कटनी। कटनी जिला प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन एवं जबलपुर संभाग स्तरीय प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन के आव्हान पर आज जिले में संचालित सीबीएसई एवं एम.पी.बोर्ड वाले सभी प्राईवेट स्कूलों के संचालक हड़ताल पर रहे। स्कूलों में ताला लटका रहा।

रैली निकालकर सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

स्कूल संचालकों ने स्कूल स्टाफ के साथ मिलकर रैली निकाली और मुख्यमंत्री के नाम का एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। प्राईवेट स्कूलों द्वारा आज हड़ताल की सूचना स्कूली छात्र-छात्राओं को नहीं दी गई थी जिसके चलते स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों को आज बिना पढ़े लिखे ही घर वापस लौटना पड़ा।
निजी स्कूल संचालकों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम का जो ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया है उसमें कहा गया है कि बेहतर और गुणवत्ता पूर्व शिक्षा देकर आदर्श समाज और राष्ट्र निर्माण में शासन की नीतियों को समर्थन सहयोग देते हुए निजी स्कूल अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे पर शासन प्रशासन द्वारा बदनियती से इन दिनों की जा रही ताबड़तोड़ शासन से स्कूल संचालक आहत है।

कानूनी और तरह-तरह की प्रतिबंधात्मक कार्यवाही के साथ निजी स्कूलों को आर्थिक चोट भी पहुंचाई जा रही। साथ ही ऐसे नये- नये नियम थोपे जा रहे जिनका पालन कर पाना असंभव है। इन परिस्थितियों के कारण निजी स्कूलों का संचालन खतरे में पड़ गया है।

संचालकों के साथ-साथ स्कूलों के स्टाफ में भी भय एवं असुरक्षा का माहौल है। ज्ञापन में आरोपित किया गया है कि स्कूल संचालकों द्वारा समय-समय पर अपनी समस्याओं से जनप्रतिनिधियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया है पर न तो जनप्रतिनिधियों ने उनकी समस्याओं पर गौर किया न ही अधिकारियों ने इस ओर ध्यान दिया।

जिसके चलते उन्हें आंदोलन के माध्यम से अपनी बात सरकार के सामने रखनी पड़ रही। वर्तमान में पूरे प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के आधीन अवैधानिक रूप से कार्यवाही की जा रही। कानून में जिन अधिकारियों को इन कार्यवाहियों को अधिकार है उनके बजाए आवांछित व्यक्ति यह कार्य कर रहे हैं। शिक्षा के अधिकार-अधिनियम के तहत विद्यालयों में पढ़ रहे 25 प्रतिशत निर्धन बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति के लिए नये नियम नहीं बनाये जा रहे।

पूर्व में प्रवेश पा चुके बच्चों के फीस की प्रतिपूर्ति भी शासन द्वारा नहीं की जा रही। ऐसा करके निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर करके उन्हें बंद होने के कगार पर ला दिया है। पिछले दिनों निजी विद्यालयों में अनेक बार शिक्षकों पर छात्रों एवं उनके परिजनों द्वारा हमले किये जा चुके हैं, झूठी शिकायतें और आरोप लगाने के कई मामले सामने आ चुके है। हाल ही में हरियाणा के एक स्कूल के प्राचार्य को छात्र ने इसलिए गोली मार दी क्योंकि आरटीओ के नये नियम का पालन करते हुए प्राचार्य ने छात्र को दो पहिया वाहन स्कूल परिसर में लाने से रोक दिया था।

शासन निजी विद्यालय संचालकों पर विभिन्न गैर शैक्षणिक कार्य थोप रहा है। सभी हाईस्कूल एवं विद्यालयों से डीपीआई एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा मान्यता एवं संबद्धता में पांच वर्ष का शुल्क लिया गया। जबकि मान्यता सशर्त केवल एक वर्ष के लिए ही दी गई। पूर्व में जमा सुरक्षा निधि राशि का न तो ब्याज दिया गया न ही राशि लौटाई गई। शासन द्वारा सभी हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी निजी स्कूलों के लिए एक एकड़ भूमि की उपलब्धता का नियम बनाया है जो पूर्णतः अनुचित एवं अव्यवहारिक है। वर्तमान में शहरों के मध्य पूर्व से संचालित स्कूलों के लिए एक एकड़ भूमि का इंतजाम कर पान संभव ही नहीं है।
निजी स्कूल संचालकों द्वारा मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि शासन अशासकीय विद्यालयों में समन्वय के लिए चुनिंदा जनप्रतिनिधियों एवं निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाकर नीति निर्धारण करें, पाठयक्रम आदि सभी में सहभागिता होने से शासन को धरातल पर आ रही परेशानियों का हल निकालने एवं शिक्षा का उन्नयन करने में अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन करना होगा तभी समस्या का समाधान होगा। अपनी मांगों को लेकर प्राईवेट स्कूल संचालकों एवं स्टाफ ने सुबह 11 बजे स्टेशन चौराहे से एक रैली निकाली जो मुख्य मार्ग होते हुए सुभाष चौक, मोहन टॉकीज रोड होते हुए कचहरी चौराहा पहुंची यहां एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा गया।
जानकारी न होने से परेशान हुए छात्र
उधर स्कूलों के हड़ताल पर जाने की जानकारी छात्र-छात्राओं को स्कूलोंं के प्रबंधन द्धारा नहीं दी गई थी। जिसके कारण आज अधिकांश स्कूलों के बच्चे रोज की तरह तैयार हुए और स्कूल पहुंच गए। स्कूल पहुंचने पर पता चला कि आज हड़ताल है। जिसके कारण छात्रों को वापस लौटना पड़ा। स्कूल से लौट रहे बच्चों का कहना था कि उन्हे हड़ताल की जानकारी पहले से होती तो वो बेवजह स्कूल आकर परेशान नहीं होते।

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