महापौर मालिनी गौड़ ने अपने बजट भाषण में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन शुल्क (ठोस अपशिष्ट उपभोक्ता प्रबंधन प्रभार) घरेलू और व्यावसायिक श्रेणी की दरों में वृद्धि का ऐलान किया था। इससे पहले निगम घरेलू श्रेणी के कचरे के लिए 60 रुपए और व्यावसायिक श्रेणी के करदाताओं से 90 रुपए प्रति माह शुल्क वसूलता था। महापौर ने घोषणा की थी कि अप्रैल 2018 से घरेलू श्रेणी में 60 के बजाय 100 और व्यावसायिक श्रेणी में 90 के बजाय 150 रुपए महीने का शुल्क वसूला जाएगा। इसके बाद सत्तापक्ष के पार्षदों और एमआईसी सदस्यों ने भी अंदरूनी रूप से नई दरों को बहुत ज्यादा बताया था।

व्यापक विरोध के बाद तय किया गया कि निगम रेट जोन के आधार पर कचरा कलेक्शन शुल्क वसूले और इसे संपत्ति कर में जोड़कर दिया जाए। इसके लिए बजट में प्रावधान कर दिया गया। सभापति अजयसिंह नरुका ने तीन महीने बाद पिछले दिनों बजट को मंजूरी दी। रेट जोन से शुल्क वसूलने के ये फायदे होंगे कि पॉश एरिया के लोगों से ज्यादा शुल्क वसूला जा सकेगा जबकि पिछड़े, अविकसित या कम विकसित क्षेत्र के लोगों को कम दरों पर शुल्क देना होगा। अब नई दरों के हिसाब से बिल जारी होना हैं। निगम ने शहर को पांच रेट जोन में बांटा है और नए बिल उसी हिसाब से जारी होंगे।

शहर में पांच लाख से ज्यादा संपत्तियां

निगम रिकॉर्ड के मुताबिक, इस समय शहर में पांच लाख से ज्यादा संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें डेढ़ लाख से ज्यादा व्यावसायिक हैं। दर्ज संपत्तियों में 80 हजार प्लॉट शामिल हैं और बाकी सभी आवासीय संपत्तियां हैं।

ये होंगी नई दरें

रेट जोन – घरेलू शुल्क – व्यावसायिक शुल्क

1 – 150 – 180

2 – 130 – 160

3 – 110 – 140

4 – 90 – 120

5 – 70 – 100

कई लोगों ने जमा कर दिया शुल्क

शहर के कई लोगों ने अप्रैल से अब तक कचरा कलेक्शन शुल्क जमा कर दिया है। ऐसे लोगों से निगम नए शुल्क के हिसाब से गणना करेगा और जमा राशि का समायोजन कर बची राशि के बिल जारी करेगा। अफसरों का कहना है कि अभी कुछ पेचीदगियों को लेकर निगम स्तर पर फैसला होना बाकी है। जैसे किसी संपत्ति का मालिक बाहर रहता है और मकान का उपयोग किराएदार कर रहा है तो कायदे से कचरा कलेक्शन शुल्क किराएदार से ही वसूला जाना चाहिए। संपत्ति कर के साथ मकान मालिक यह शुल्क क्यों देगा?

अभी संकल्प नहीं आया

कचरा कलेक्शन शुल्क बढ़ाने की घोषणा बजट में हुई थी। उसे लेकर क्या संकल्प आया है, वह मेरी जानकारी में नहीं है, इसलिए जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकूंगा।– देवेंद्रसिंह, अपर आयुक्त, नगर निगम