Saturday, May 2, 2026
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दिवालिया कानून को लेकर सरकार का बड़ा ऐलान, कंगाल हो रही कंपनियों को मिलेगी राहत

नई दिल्ली. देशभर में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने आज से एक साल के लिए नई इन्सॉल्वेंसी प्रक्रियाओं (Insolvency Proceedings) को सस्पेंड कर दिया है. साथ ही, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कोविड-19 से संबंधित कर्ज को ‘डिफॉल्ट’ की श्रेणी में नहीं डाला जाएगा. आर्थिक राहत पैकेज (Economic Package 2.0) का अंतिम ऐलान में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने आज कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए कई ऐलान किया है.

> इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू करने के लिए न्यूनतम डिफॉल्ट की रकम (Minimum Threshold Amount) को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है. पहले यह रकम 1 लाख रुपये थी. सरकार के इस कदम से प्रमुख तौर से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (MSME) स्तर के कारोबार को बड़ी राहत मिलेगी.

> IBC के सेक्शन 240A के तहत MSME के लिए स्पेशल इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्युशन फ्रेमवर्क (Insolvency Resolution Framework) तैयार किया जाएगा.

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> अगले एक साल तक कोई भी इन्सॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स को फाइल नहीं किया जाएगा. वित्त मंत्री ने बताया कि मौजूदा महामारी की स्थिति को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है. इसके बाद अब अगले एक साल तक के लिए कोई भी कंपनी दिवालिया प्रक्रिया के लिए फाइलिंग नहीं करेगी.

> साथ ही, सरकार ने कहा कि कोविड-19 संबंधित कर्ज को IBC ‘डिफॉल्ट’ की परिभाषा के तहत नहीं शामिल किया जाएगा. इससे कंपनियों को इन्सॉल्वेंसी के लिए फाइलिंग नहीं करने से राहत मिल सकगी.

कंपनीज एक्ट के तहत नहीं माने जाएंगे ये अपराध
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि छोटी तकनीकी व प्रक्रियात्मक चूकों को अब अपराधीकरण की सूची से निकाला जा रहा है. कंपाउंडेबल ऑफेंसेज के तहत 18 सेक्शन की सीमा को बढ़ाकर 58 कर दिया गया है. 7 कापाउंडेबल ऑफेंसेज को पूरी तरह से ड्ऱॉप कर दिया गया है और 5 को अल्टरनेटिव फ्रेमवर्क के तहत लिया जाएगा. इससे कंपनी की हरासमेंट कम होगी.

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम