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टॉप वायरोलॉजिस्ट ने छोड़ा कोविड पैनल, मार्च में ही दे दी थी कोरोना वेरिएंट के खतरनाक होने की चेतावनी

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एक शीर्ष भारतीय वायरोलॉजिस्ट ने कोरोनो वायरस के वेरिएंट का पता लगाने के लिए सरकार द्वारा स्थापित वैज्ञानिक सलाहकारों के एक मंच से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने रविवार को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी। हालांकि, INSACOG के नाम से जाने जाने वाले फोरम के वैज्ञानिक सलाहकार समूह के अध्यक्ष शाहिद जमील ने अपने इस्तीफे का कारण बताने से इनकार कर दिया।

उन्होंने एक टेक्स्ट संदेश में कहा, “मैं कोई कारण बताने के लिए बाध्य नहीं हूं।” उन्होंने कहा कि उन्होंने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया।

INSACOG की देखरेख करने वाले जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने इस स्तीफे पर टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा। INSACOG के अन्य सदस्य ने कहा कि उन्हें जमील और सरकार के बीच किसी भी प्रत्यक्ष असहमति के बारे में पता नहीं था।

फोरम का हिस्सा रहे एक शीर्ष सरकारी वैज्ञानिक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उन्हें नहीं लगता था कि जमील के जाने से INSACOG के वायरस वेरिएंट की निगरानी में बाधा आएगी।

रॉयटर्स ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि भारतीय SARS-CoV-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम, INSACOG ने मार्च की शुरुआत में सरकारी अधिकारियों को देश में कोरोना वायरस के एक नए और अधिक संक्रामक संस्करण के बारे में चेतावनी दी थी। वैरिएंट, बी.1.617 के कारण भारत वर्तमान में कोविड -19 मामलों में दुनिया के सबसे खराब संक्रमण से जूझ रहा है।

यह पूछे जाने पर कि सरकार ने निष्कर्षों पर अधिक मजबूती से प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी, उदाहरण के लिए बड़ी सभाओं को प्रतिबंधित करने जैसी बात पर। इसके जवाब में जमील ने रॉयटर्स से कहा था कि वह चिंतित थे कि अधिकारी सबूतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे थे।

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