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कोरोना वायरस के इलाज में गेमचेंजर हो सकती है प्लाज्मा थैरेपी

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इंदौर । कोरोना का दंश झेल रही दुनिया के लिए राहतभरी खबर है कि प्लाज्मा थैरेपी इस बीमारी के इलाज में गेमचेंजर की भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीज जो कोरोना को मात देकर अस्पतालों से डिस्चार्ज हो चुके हैं, उनके शरीर में कोविड-19 वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी होती हैं। इन स्वस्थ्य हो चुके मरीजों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर कोरोना के मरीजों के शरीर में इंजेक्ट किया जाए तो ये एंटीबॉडीज उनके शरीर में फैले कोविड-19 वायरस को खत्म कर बीमारी पर जीत दिला सकती है। प्लाज्मा देने के लिए अमेरिका में 80 हजार से ज्यादा स्वस्थ्य हो चुके मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। इंदौर में भी इसे लेकर काम शुरू हो गया है।

इंदौर में कोरोना के ढाई सौ से ज्यादा मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 30 की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों के मुताबिक वायरस की प्रकृति निमोनिया जैसी ही है, लेकिन कोविड-19 के संक्रमण की गति इतनी अधिक है कि दवाइयां असर करे, उसके पहले ही वायरस फेफड़ों को नुकसान पहुंचा चुका होता है। यही वजह है कि दवाइयां गंभीर मरीजों पर बेअसर साबित हो रही हैं। हाल ही में इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से कोरोना संक्रमण को लेकर केरल के एक मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट को प्लाज्मा थैरेपी के ट्रायल की अनुमति मिलने के बाद उम्मीदें जगी हैं कि जल्दी ही कोरोना का इलाज मिल जाएगा।

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ऐसी स्थिति में जब इस बीमारी का फिलहाल कोई ठोस इलाज नहीं है, प्लाज्मा थैरेपी को लेकर विचार करना चाहिए। राहत की बात यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए स्वस्थ हो चुके मरीजों का रिकॉर्ड सहेजना शुरू भी कर दिया है। तीन सप्ताह तक इन मरीजों की सतत निगरानी की जाएगी ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर संपर्क किया जा सके

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