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कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया के सामने होगी कई चुनौतियां

जबलपुर प्रतिनिधि। पूर्व विधानसभा को एक बार फिर लखन घनघोरिया के रूप में स्थायी मंत्री मिल गया है। हालांकि पूर्व विधानसभा की परिस्थितियों को देखते हुए मंत्री पद की शपथ लेने वाले पूर्व विधानसभा विधायक लखन घनघोरिया के सामने चुनौतियां कम नहीं होगी। इन्हें बेलगाम लोगों पर भी लगाम लगानी होगी, जिससे वर्षो से विकास की दौड़ में पिछड़े क्षेत्र की तश्वीर बदल सके। चुनावी दौर में प्रदेशभर में पूर्व विधानसभा क्षेत्र का परिणाम लोगों के लिए कौतुहल का विषय रहा । प्रत्याशियों में सत्ता संघर्ष खूनी संघर्ष में परिवर्तित हो चला था। माहौल इतना गर्म था कि एसपी और कलेक्टर को यहां पड़ाव डाले रहना पड़ा। पर चुनाव में कांग्रेस के लखन घनघोरिया ने बाजी मारी। चुनाव पूर्व उन्होने आम जनता से वादा किया था कि वे जीतने के बाद जुआं फड़, नशे की मंड़ी के रूप में पहचान बना चुके इस क्षेत्र को इस समस्या से मुक्त कराएगें, इस वादे से प्रभावित होकर यहां की आम जनता ने इन्हें विधायक के रूप में चुनकर विधानसभा भेजा। अब बारी लखन की है जनता की उम्मीदों को पूरा करने की। अब देखना यह है कि मंत्री श्री घनघोरिया इन परिस्थितियों को किस तरह चुनौती के रूप में लेकर जनता से किया वादा पूरा करते है।
महिलाओं की स्थिति दयनीय
क्षेत्र के युवाओं के नशे में गिरफ्त में आने के कारण कई गृहस्थियां तबाह हो गयी। सबसे बुरी स्थिति यहां रह रही महिलाओं की हो गयी। पति की निष्क्रियता और बच्चों की भूख देख इन्हें उन कार्यों को करने विवश होना पड़ा जो सभ्य समाज का हिस्सा नहीं है।
युवाओं की बेरोजगारी और नशे की लत
अनुसूचित जाति की आरक्षित पूर्व विधानसभा की यह सीट अधिकांशत बेरोजगारों से भरी हुई है युवाओं के पास रोजगार के कोई अवसर ना होने की कारण वे पथभ्रष्ट होकर या तो नशे की गिरफ्त में आ गए है या स्वंय नशे के व्यापारी बन गए है।
विकास की दौड़ में पिछड़ा
देश भर में जहां विकास की गाथा सुनाई दे रही थी वही यह क्षेत्र विकास की दौड़ में पिछड़ता गया हालांकि इस विधानसभा सीट पर कई वर्षो से भाजपा का कब्जा रहा और प्रदेश में भाजपा सत्तासीन रही बावजूद इसके विकास संबंधी उन्नयन कार्यक्रम के अभाव में पिछड़ता गया यहां तक कि गुरंदी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा अवैध कब्जों से खाली जमीन का उपयोग नही हुआ जिस कारण एक बार फिर यह बेशकीमती जमीन अतिक्रमण के चपेट में आ गई है।
चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ापन
उन क्षेत्रों में जहां गरीब रहवासी अधिक संख्या में है वहां ना तो चिकित्सा की पर्याप्त सुविधा है और ना तो कोई महाविद्यालय और ना ही मैट्रिक तक शासकीय स्कूल मौजूद है। जिसके कारण यहां उच्च शिक्षा हेतु छात्र व छात्राओं को दूर जाना पड़ता है छात्रों के लिये तो यह संभव है लेकिन छात्राओं के लिये शिक्षा का समापन यही हो जाता है।
स्वंय के लोगों पर लगाम लगाना चुनौती
लखन के सामने केवल विरोधी सत्ता के बेलगाम लोगो पर लगाम कसना ही एकमात्र चुनौती ना होकर कांग्रेस से जुड़े लोगों पर भी नकेल कसना किसी चुनौती से कम नही होगा। जगजाहिर है कि इस क्षेत्र में कई अपराधी से नेता बने लोगों का आज भी रोजगार अवैध कार्य ही है।

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