वेब डेस्क। दक्षिण की राजनीति में दबदबा रखने वाले डीएमके अध्यक्ष एम करुणानिधि 94 साल की उम्र में इस दुनिया से रुखसत हो गए। करुणानिधि ने चेन्नई के कावेरी अस्तपाल में आज आखिरी सांस ली।
ब्लड प्रेशर कम होने के बाद उन्हें कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका हाल-चाल जानने वालों की फेहरिस्त जानकर ही ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें दक्षिण की राजनीति की घुरी क्यों माना जाता है। देश का शायद ही कोई ऐसा सियासी दल होगा, जिसके नेता उनसे मिलने नहीं पहुंचे थे।
आंखों पर हमेशा काला चश्मा और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि की शख्सियत से जुड़ी हैं। करुणानिधि का केवल तमिलनाडु या दक्षिण भारत की राजनीति पर ही असर नहीं रहा, बल्कि देश की सियासत में भी वो हमेशा मौजूं ही रहे।
शायद ये कम ही लोग जानते होंगे कि करुणानिधि ने बतौर स्क्रीनप्ले राइटर तमिल सिनेमा के दो सबसे बड़े चेहरे एमजीआर और शिवाजी गणेशन दोनों के लिए फिल्में लिखीं और उनकी लिखी फिल्म ने इन दोनों के करियर को नई बुलंदियों तक पहुंचा दिया।
उनका ‘अम्मा’ यानि जयललिता से छत्तीस का आंकड़ा रहा। मगर फिर भी दक्षिण या देश की राजनीति में एम करुणानिधि किंगमेकर की भूमिका में रहे।
हालांकि इसके बाद भी उनसे जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो कम लोग ही जानते होंगे। ऐसे में करुणानिधि जिन्हें समर्थक प्यार से ‘कलईगनर’ पुकारते हैं।
उनसे जुड़ी दस बातें
- 14 साल की छोटी उम्र में ही करुणानिधि राजनीति में आ गए थे। इसी उम्र में वो द्रविड़ आंदोलन में कूद गए और युवाओं का एक संगठन खड़ा किया था।
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करुणानिधि ने राजनीति में 6 दशक बिताए। इस दौरान वो जितनी बार भी चुनाव मैदान में उतरे, हमेशा जीत उनकी झोली में ही आई। वो कभी अपनी सीट नहीं हारे।
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करुणानिधि का असली नाम दक्षिणामूर्ति है। उनका जन्म तिरुवरूर के तिरुकुवालई में हुआ था।
-आपको जानकर हैरानी होगी कि तमिल फिल्म के सुपरस्टार शिवाजी गणेशन की डेब्यू फिल्म ‘पराशक्ति’ करुणानिधि ने ही लिखी थी। ये फिल्म अपने धमाकेदार डायलॉग्स के लिए आज भी याद की जाती है। इस फिल्म को तमिल सिनेमा में शोले की तरह याद किया जाता है।
-शुरुआती दौर में करुणानिधि को अपनी लेखनी को लेकर विरोध झेलना पड़ा। शिवाजी गणेशन की फिल्म ‘पराशक्ति’ में हिंदू रीति-रिवाजों को जिस ढंग से पेश किया गया था, उसे लेकर करुणानिधि कट्टरपंथियों के निशाने पर आए थे। तत्कालीन तमिलनाडु सरकार ने फिल्म पर बैन लगाने की बात कही थी। विवाद की वजह से उनके दो प्ले पर भी बैन लगा था।
- शिवाजी गणेशन की तरह ही करुणानिधि ने जयललिता के गुरू एमजीआर के लिए बनी फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा था। ‘मंथरी कुमारी’ नाम की फिल्म ने एमजीआर के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई।
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वो 12 बार तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए।
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1997 में मणि रत्नम की फिल्म ‘इरुवर’, जिसमें मोहन लाल, प्रकाश राज और एश्वर्या ने काम किया था वो एमजीआर से उनके रिश्तों की कहानी थी।
-उन्होंने अमेरिकी डायरेक्टर एलिस डंगन्स की आखिरी फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा था। इस डायरेक्टर को तमिल सिनेमा को नए दौर में ले जाने का श्रेय जाता है।
- 2006 में जब वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने तो वो इस राज्य के सबसे उम्रदराज सीएम थे।
एम करुणानिधि का विवादों से भी हमेशा नाता रहा। खासतौर पर अपने बयानों को लेकर हमेशा वो सुर्खियों में रहते थे। ऐसा ही एक बयान उनकी तरफ से 2007 में आया था। जब उन्होंने ऱाम सेतु के जरिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान
भगवान राम पर दिया था विवादित बयान
दरअसल एम करुणानिधि ने उस वक्त कहा था कि, “कुछ लोग कहते हैं कि 1.7 लाख साल पहले एक शख्स आया था। उसका नाम राम था। उस ब्रिज को मत छुओ( राम सेतु) जिसे राम ने बनाया है। आखिर कौन है राम? किस इंजीनियरिंग कॉलेज से वो ग्रेजुएट हुए थे? क्या इसका कोई सबूत है?”
वहीं दो साल बाद उन्होंने प्रतिबंधित संगठन एलटीटीई चीफ प्रभाकरण को लेकर भी ऐसा बयान दिया, जिससे वो विवादों में आ गए थे। दरअसल भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करने वाले प्रभारकण को उन्होंने आतंकी मानने से ही इंकार कर दिया था। हालांकि विवादों के बाद उन्होंने खंडन किया।
ऐसी ही उनकी राजनीतिक विरासत
डीएमके चीफ करुणानिधि ने तीन शादियां की है। पहली पत्नी पद्मावती अम्मल से उन्हें दो बेटे हुए थे, जिनकी कम उम्र में ही मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने दयालु अम्मल से शादी की और उन्हें चार बच्चे हुए। एमके अझागिरी, एमके स्टालिन, एमके तमिलारासु और सेल्वी। इसके बाद उन्होंने राजाथिअम्मल से शादी की, जिससे उन्हें एक बेटी कनिमोई हुई। जो आज राजनीति में सक्रिय हैं।
