jabalpur

एक अनार सौ बीमार-द्वार पर खड़ी सत्ता ,कांग्रेस की गुटबाजी ले ना डूबे

जबलपुर। राजनीति में कब कौन दोस्त, दुश्मन हो जाए ? कौन दुश्मन दोस्त हो जाए ? यह वाक्य वर्तमान में दोनों पार्टियों में चरितार्थ हो रहा है। कांग्रेस के हाल एक अनार सौ बीमार जैसे है, ऐसे में राजनीतिक पंडितों को मानना है यदि अनार का जूस बनाकर कांग्रेसियों को सत्ता तक पहुंचना है तो कुछ कड़वा घूंट भी पीना पड़ेगा। जबलपुर में ही एक विधानसभा क्षेत्र के 17 से ज्यादा टिकतार्थी हैं। राहुल गांधी के रोड में कांग्रेसी मजबूती भी दिखी, पर सवाल यह उठता है कि टिकिट घोषित होने तक मजबूती रोड शो तक सीमित होकर ना रह जाए ।

15 साल से सत्ता से दूर बैठी कांग्रेस हर हाल में सत्ता में काबिज होना चाहती है । सर्वे भी कांग्रेस के पक्ष में आए है।अब इस सर्वे का लाभ उठाने का दायित्व कांग्रेसियों का है । बहरहाल जनता के दुख-दर्दर् को ध्यान में रखते हुए लामबंद होकर यदि कांग्रेस चुनाव लड़ती है तो पौ बारह, क्षेत्र में मैं बड़ा कि तू बड़ा इसको क्रियान्वित करती है
उत्तर भाजपा की बल्ले-बल्ले
शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है, उसमें एक खबर यह भी है कि आपस में लडकर व्यंजनों की थाली भाजपा की तरफ खिसकाने में कांग्रेसी विश्वास करते है, या खुुद ही स्वाद चखते है । बहरहाल वरिष्ठ कांग्रेस नेता को फूंक फूंक कर कदम रख रहे है । बड़ा सवाल ये है कि प्रत्याशी चयन ऐसा हो कि सत्ता दरवाजे में खटखटाकर ना निकल जाए। स्थिति परिस्थिति जो भी हो, इस समय ज्योतिषाचार्यों की चांदी निकल आयी है, दोनों पार्टियों के प्रत्याशी अपनी कुंडली व पार्टी की कुंडली मतदान तारीख से मेल मिलाप कर ग्रहों का योग कर अपना भविष्य तलाश रहे हैं।

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