भोपाल। उपचुनाव में बगैर किसी सर्वे के उम्मीदवार तय किए जाने की परिस्थितियां बन गई हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व सीएम कमल नाथ 22 सीटों पर सर्वे के आधार पर टिकट देना चाहते थे। क्योंकि सरकार गिरने की सबसे अधिक कसक उन्हीं को है।
प्रदेश कांग्रेस ने सर्वे का कार्य प्रशांत किशोर (पीके) को लगभग सौंप दिया था, लेकिन पीके ने सर्वे के साथ चुनाव में जीत के लिए मुद्दे तलाशने से हाथ खड़े कर दिए हैं। सर्वे का फार्मूला फेल हो जाने के बाद दिग्विजय सिंह समर्थकों की टिकट के लिए उम्मीदें बढ़ गई हैं।
दिग्विजय सिंह पार्टी हाइकमान व कमल नाथ पर दबाव बनाकर ग्वालियर-चंबल अंचल की 16 सीटों पर अपने समर्थकों को टिकट दिलवाने का प्रयास करेंगे। ताकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र में उनका दबदबा बढ़ सके।
सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफा देने के कारण कमल नाथ सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके समर्थित पूर्व विधायकों ने भाजपा की सदस्या ग्रहण कर ली है।
इन 22 सीटों में से 16 ग्वालियर-चंबल अंचल की हैं। इनमें से जौरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक बनवारी लाल शर्मा के निधन के कारण उपचुनाव होना है।
जौरा सीट की गिनती भी सिंधिया के प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्र के रूप में होती है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने पहली बार बगैर किसी दबाव के टिकट देने के लिए सर्वे कराने का पासा फेंका था, जो कि फिलहाल फेल हो गया है।
दिग्विजय सिंह लंबे अरसे से ग्वालियर-चंबल अंचल के इकलौते क्षत्रप होने के महात्वकांक्षा रखते हैं। दिग्विजय सिंह इसके लिए माधवराव सिंधिया के समय से संघर्षरत है।, लेकिन उनके प्रयासों में महल हमेशा आड़े आता रहा है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद रास्ता साफ हो गया। अब दिग्विजय सिंह का प्रयास होगा कि ग्वालियर-चंबल अंचल के 16 विधानसभा क्षेत्रों में उनके समर्थकों को टिकट मिले। भले ही नतीजे कुछ भी निकलें।
टिकट वितरण के लिए पुरानी परंपरा पर लौट सकती है कांग्रेस
जिला कार्यकारिणी से पैनल मांगा जाएगा। पैनल दबाव में तैयार होगा और टिकट उसी को मिलेगा, जिन्हें क्षेत्र की जनता की बजाए नेता पसंद करेंगे।
ग्वालियर-चंबल अंचल की इन सीटों पर होने हैं उपचुनाव
जिला ग्वालियरः उपनगर ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व व डबरा(अजा)।
