जबलपुर। समस्याओं को लेकर कोई नेतागिरी नहीं करोगे। न कि किसी दलगत राजनीति में हिस्सा ले सकते हो। ऐसा कुछ किया तो दंड के भागीदार बनोगे। ऐसी शपथ फाइन आर्ट कॉलेज के छात्रों से दिलवाई जा रही है। वो भी लिखा-पढ़ी में। इतना ही नहीं विद्यार्थियों के किसी भी तरह के आंदोलन और आवाज उठाने पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि जब प्राचार्य से ऐसे शपथ पत्र को लेकर बात की गई तो वो इससे अनजान थीं।
पुराने आंदोलन से खफा –
ललित कला संस्थान में पहले समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था। संस्थान से लेकर सड़क तक आंदोलन चलाया गया। छात्र टायलेट, पानी और भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप था कि प्राचार्य को लंबे समय तक शिकायत करने के बाद जब सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरी में सड़क पर प्रदर्शन करना पड़ा। कलेक्टर से लेकर संस्कृति विभाग तक जांच के घोड़े दौड़े। नतीजा कुछ खास नहीं निकला। समस्याएं अब भी बरकरार हैं। विद्यार्थियों ने संस्थान को अलग जगह शिफ्ट करने की मांग भी उठी थी।
शर्तें इस तरह –
विद्यार्थी फिर से संस्थान के खिलाफ आवाज बुलंद न कर सकें इसके लिए शपथ पत्र भरवाया जा रहा है। प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को एक फार्म दिया गया है जिसमें कई बिंदुओं में नियम-शर्तें दर्ज हैं। इसमें बिंदु 6 से 8 को लेकर विद्यार्थियों ने आपत्ति ली। इसमें समस्या होने वाले सिर्फ शिक्षकों और प्राचार्य से शांतिपूर्ण ढंग से बात करने को कहा गया। आंदोलन और हिंसा जैसे कृत्य पर पाबंदी रहेगी। दलगत राजनीति में हिस्सा लेने पर भी रोक लगाई है। सिर्फ यहीं नहीं कोई भी विद्यार्थी मीडिया या आवाज उठाने वाले दलों के कार्यकर्ता से भी अपनी बात नहीं कह सकते हैं। विद्यार्थियों के अलावा उनके अभिभावकों की भी मंजूरी मांगी जा रही है।
वर्जन –
शपथ पत्र को लेकर मुझे कुछ नहीं पता है। वैसे भी बच्चों को अनुशासन में रहना चाहिए। इस संबंध में कुछ भी नहीं कह सकती।
सीमा डेकाटे, प्राचार्य, ललितकला फाइन आर्ट कॉलेज

