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अजब MP के गजब अधिकारी, आदेश में बता डाली 30 की फरवरी, जनिये विगढ़ SDM का आदेश जो बना सुर्खियों में

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कटनी। कटनी के विजयराघवगढ़ में SDM का एक आदेश सोशल मीडिया की सुर्खियों में है। फरवरी का महीना 30 दिनों के बताने वाले इस आदेश से फिलहाल  बवाल मचा है जिसे लोग खूब मजे से अलग अलग कारणों में पिरो रहे हैं।

दरअसल विजयराघवगढ़ विकासखण्ड की एसडीएम ने एक मेले को 16 फ़रवरी से 30 फ़रवरी तक चलने का आदेश सील ठप्पे के साथ जारी कर दिया, इसके बाद सियासी बयानबाजी शुरू हो गई।

वैसे तो कहा जाता है कि मध्यप्रदेश अजब और गजब है, यहां कई बार ऐसे कारनामें देखने को मिल जाते हैं जिन्हें देख सुन कर आप भी कह उठेंगे क्या गजब है। ऐसा ही एक मामला कटनी जिले से सामने आया है, जिसे देख-सुनकर आप के मुह से खुद हीं निकल जाएगा क्या गजब है…।

दरअसल सभी को पता है कि फ़रवरी का महीना अट्ठाईस दिन का होता है, लेकिन हर चार साल में एक बार महीना उन्तीस दिन का हो जाता है। इसके पीछे साल चक्र और घंटा मिनट का वैज्ञानिक कारण है, जिसके चलते चार साल में एक दिन बढाया जाता है लेकिन अगर हम आपसे यह कहें कि राज्य प्रशासनिक सेवा पास कर चुके किसी अधिकारी ने इसे तीस दिन का महीना बताकर सरकारी फ़रमान जारी कर दिया हो तो आप क्या कहेंगे?

ये गजब कारनामा कर दिखाया है अपने ही कटनी जिले के विजयराघवगढ विकास खण्ड की एसडीएम प्रिया चन्द्रावत ने- वैसे जब इन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की तो इन्होंने अपने एक इन्टरव्यू में कहा था कि इस पद पर पहुंचने के लिए इन्होंने दिन रात एक कर दिया था। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए एक जूनून की जरुरत होती है और दिमाग को बेहद शार्प रखना पड़ता है। लेकिन उनसे ही चूक हो गई और उन्होंने फ़रवरी का महीना तीस दिन का बता दिया?

दरअसल मामला है बरही में आयोजित होने वाले मेले की जो 16 फ़रवरी बसंत पंचमी से शुरू होकर 2 मार्च तक आयोजित किया जाना था लेकिन विजयराघवगढ़ विकासखण्ड की एसडीएम ने इस मेले को 16 फ़रवरी से 30 फ़रवरी तक चलने का आदेश सील ठप्पे के साथ जारी कर दिया। आदेश जारी होने के बाद मामला सुर्खियों में आया और तरह तरह की बयान बाजियां भी खुल कर सामने आने लगीं कांग्रेस के नेताओं के लिए तो शासन का यह फ़रमान पूरे सरकारी तंत्र को घेरने के लिए रामबाण मिल गया, जिसके बाद कांग्रेसी नेताओं ने इस मामले में अपना-अपना बयान जारी करना भी शुरू कर दिया।

हालांकि मामले आपत्ति आने के बाद एसडीएम महोदया ने संशोधित आदेश जारी कर दिया, जिसमें उन्होंने 16 फ़रवरी से 2 मार्च का जिक्र भी कर दिया। लेकिन इस वाकये से एक बात तो साफ़ है कि अधिकारी बिना देखे और पढ़े बाबूओं के बूते कार्यालय चला रहे हैं, जिसकी फ़जीहत उन तमाम अधिकारियों को भी झेलनी पड़ रही है, जो पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करते हैं।

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