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सुपौल में धान के खेत में घुसा विशाल मगरमच्छ: कंधे पर लादकर थाने पहुंचा युवक; वीडियो वायरल

धान के खेत में दिखा मगरमच्छ, कंधे पर लादकर थाने ले गया युवक!" बिहार के सुपौल की हैरान करने वाली तस्वीर

सुपौल में धान के खेत में घुसा विशाल मगरमच्छ: कंधे पर लादकर थाने पहुंचा युवक; वीडियो वायरल

सुपौल: बिहार के सुपौल जिले के भीमनगर थाना क्षेत्र से एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के लालपुर वार्ड-14 में शुक्रवार को एक धान के खेत में अचानक विशालकाय मगरमच्छ निकलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। खेत में काम कर रहे किसानों ने जैसे ही मगरमच्छ को देखा, वहाँ अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया और देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने हर किसी को दंग कर दिया।

मुंह पर रस्सी बांधी और कंधे पर लादकर पहुंचे थाना

  • ग्रामीणों का साहस: शुरुआत में घबराने के बाद स्थानीय युवकों ने जबरदस्त हिम्मत और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने मगरमच्छ को बिना नुकसान पहुँचाए बेहद सावधानी से काबू में किया और उसके मुंह को रस्सी से बांध दिया।
  • वन विभाग की देरी से अनोखा कदम: वन विभाग (वीरपुर) को तुरंत सूचना देने के बाद भी जब टीम को पहुँचने में समय लगा, तो एक युवक ने बिना अपनी जान की परवाह किए मगरमच्छ को सीधे अपने कंधे पर उठाया और पैदल ही भीमनगर थाने पहुँच गया।
  • वीडियो हुआ वायरल: युवक द्वारा कंधे पर मगरमच्छ ले जाने का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर हैरान हैं।

कोसी नदी में सुरक्षित छोड़ा गया 4 फ़ीट से लंबा मगरमच्छ

भीमनगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार की सूचना पर तुरंत वन विभाग की टीम थाने पहुँची और मगरमच्छ को अपने कब्जे में लिया:

  • पूरी तरह स्वस्थ: स्वास्थ्य जांच के बाद पाया गया कि मगरमच्छ पूरी तरह ठीक है और उसे कोई चोट नहीं आई है।
  • लंबाई: वन विभाग के फॉरेस्टर रवि रंजन ने बताया कि रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ की लंबाई लगभग 4 फ़ीट 16 इंच थी।
  • प्राकृतिक आवास में वापसी: विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास कोसी नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

 वन विभाग की चेतावनी और अपील

फॉरेस्टर रवि रंजन ने बताया कि मानसून के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ने और जलमार्ग आपस में जुड़ जाने के कारण मगरमच्छ जैसे जलीय जीव बहकर रिहायशी इलाकों और खेतों में आ जाते हैं।

वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि:

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