Yes Bank AT-1 Bond Case: सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय को लताड़ा, यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के बॉन्ड माफी मामले में दोपहर 3 बजे तक मांगा कैबिनेट रिकॉर्ड। देश की सबसे बड़ी अदालत (Supreme Court) ने यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को पूरी तरह माफ करने (बट्टे खाते में डालने) के मामले में केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने साल 2023 में लिए गए इस फैसले को लेकर वित्त मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाई।
Yes Bank AT-1 Bond Case: सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय को लताड़ा, यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के बॉन्ड माफी मामले में दोपहर 3 बजे तक मांगा कैबिनेट रिकॉर्ड
जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में सीधे कैबिनेट के फैसलों पर सवाल उठाते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता को आज ही दोपहर 3 बजे तक कैबिनेट बैठक के मूल रिकॉर्ड, कोरम का विवरण और संबंधित दस्तावेज कोर्ट के समक्ष पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।
कोर्ट ने वित्त मंत्रालय से पूछे तीखे सवाल, मांगा कोरम विवरण
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल मेहता को निर्देश दिया कि वे दोपहर 3 बजे तक वह कैबिनेट प्रस्ताव और बैठक की कार्य चर्चा (Minutes of the Meeting) प्रस्तुत करें, जिसके आधार पर साल 2023 में हजारों खुदरा और संस्थागत निवेशकों के 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड को शून्य (माफ) घोषित कर दिया गया था।
जस्टिस दत्ता की पीठ ने केवल दस्तावेज ही नहीं, बल्कि कैबिनेट बैठक के नियमों का पूर्ण खुलासा, निर्णय लेने वाली बैठक का कोरम और उस दौरान उपस्थित सभी सदस्यों और मंत्रियों के नामों की सूची भी तलब की है।
क्या है पूरा विवाद? (बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती)
यह पूरा मामला साल 2020 में यस बैंक के संकट में फंसने के बाद शुरू हुआ था, जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पुनर्गठन प्लान के तहत यस बैंक के एटी-1 बॉन्ड्स को पूरी तरह से राइट-ऑफ (Write-off) यानी खत्म कर दिया गया था।
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निवेशकों को लगा था झटका: रिलायंस निप्पॉन जैसे म्यूचुअल फंड्स, कई बड़े वित्तीय संस्थानों और हजारों रिटेल (खुदरा) निवेशकों ने यस बैंक के इन बॉन्ड्स में कुल 8,415 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो रातों-रात डूब गया।
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हाई कोर्ट ने निवेशकों को दी थी राहत: इस फैसले के खिलाफ खुदरा बॉन्डधारकों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जनवरी 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरबीआई और यस बैंक के इस राइट-ऑफ के फैसले को रद्द कर दिया था और निवेशकों के पक्ष में आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के पाले में आई गेंद
बॉम्बे हाई कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ यस बैंक, रिजर्व बैंक और केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। पिछले तीन सालों से चल रही इस कानूनी लड़ाई में अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से वह मूल आधार मांग लिया है, जिसके तहत इतने बड़े वित्तीय नुकसान का फैसला लिया गया था। दोपहर 3 बजे सरकार द्वारा सौंपे जाने वाले कैबिनेट दस्तावेजों के बाद इस केस में कोई बड़ा और निर्णायक मोड़ आने की उम्मीद है। Yes Bank AT-1 Bond Case: सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय को लताड़ा, यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के बॉन्ड माफी मामले में दोपहर 3 बजे तक मांगा कैबिनेट रिकॉर्ड

