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Yashbharat.com EXCLUSIVE: “जहाँ बलि‍दान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है; जहाँ जन्म लिए मुखर्जी , वो बंगाल हमारा है!” बंगाल की ऐतिहासिक जीत के साथ नारों से गूंजा कोलकाता

Yashbharat.com EXCLUSIVE: "जहाँ बलीदान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है; जहाँ जन्म लिए श्यामा प्रसाद ने, वो बंगाल हमारा है!" बंगाल की ऐतिहासिक जीत के साथ नारों से गूंजा कोलकाता

Yashbharat.com EXCLUSIVE: "जहाँ बलीदान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है; जहाँ जन्म लिए श्यामा प्रसाद ने, वो बंगाल हमारा है!" बंगाल की ऐतिहासिक जीत के साथ नारों से गूंजा कोलकाता

Yashbharat.com EXCLUSIVE: “जहाँ बलि‍दान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है; जहाँ जन्म लिए मुखर्जी , वो बंगाल हमारा है!” बंगाल की ऐतिहासिक जीत के साथ नारों से गूंजा कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल सत्ता की चाबी बदली है, बल्कि दशकों पुराने नारों को एक नई पहचान दे दी है। जैसे-जैसे रुझानों में भाजपा 190 सीटों के आंकड़े को पार कर ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ी, वैसे-वैसे कोलकाता के ‘हेस्टिंग्स’ कार्यालय से लेकर दिल्ली के ‘दीनदयाल उपाध्याय मार्ग’ तक केवल एक ही नारा गूँज रहा है—

“जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है… और जहाँ जन्म लिया श्यामा प्रसाद ने, वो बंगाल हमारा है!”

धारा 370 से लेकर बंगाल की सत्ता तक: एक भावुक सफर

यह नारा भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान और उनके विजन को समर्पित है। भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि एक वैचारिक विजय है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घर जाएंगे प्रदेश अध्यक्ष

ऐतिहासिक जीत के संकेतों के बीच, बंगाल भाजपा अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने घोषणा की है कि वे सबसे पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक घर जाएंगे।

Yashbharat.com विश्लेषण: नारों ने बदला माहौल

इस बार के चुनाव में “जय श्री राम” के साथ-साथ डॉ. मुखर्जी की विरासत वाले नारों ने बंगाल के भावनात्मक वोट बैंक में गहरी सेंध लगाई है। भाजपा ने इसे ‘अस्मिता की लड़ाई’ बनाकर पेश किया, जिसका असर आज ईवीएम (EVM) के नतीजों में साफ दिख रहा है।

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