सांपों की दुनिया: मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली 40 प्रजातियां और उनसे जुड़े मिथक
सांपों की दुनिया: मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली 40 प्रजातियां और उनसे जुड़े मिथक
सांपों की दुनिया: मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली 40 प्रजातियां और उनसे जुड़े मिथक को जानिये। सांपों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित किया गया। कार्यशाला में सर्प विशेषज्ञों ने बताया कि सांपों से डरने की नहीं, उन्हें समझने की जरूरत है। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को सांपों की पहचान, उपचार और उनकी खाने-पानी की आदतों के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यशाला में बताया गया कि दुनिया में सांपों की 3,500 प्रजातियां हैं, जिनमें से प्रदेश में मुख्यत: 40 प्रजातियों के सांप मिलते हैं। इनमें भी जहरीले सांपों की सिर्फ चार प्रजातियां हैं।
सांपों के बारे में फैले मिथकों को तोड़ते हुए बताया गया कि सांप दूध नहीं पीते हैं और न ही उनमें हमलावरों को पहचाने और याद रखने की शक्ति होती है। सांपों के कान के पर्दे नहीं होते हैं, लेकिन वे जमीन से आने वाले कंपन को और कम आवृत्ति वाली हवा में आने वाली आवाज को पकड़ने में सक्षम होते हैं।
सांपों के बारे में फैले हैं ये मिथक
सांप दूध नहीं पीते हैं, इसलिए नाग पंचमी पर जब सपेरे सांप लेकर आए तो उन्हें दूध न पिलाएं। सपेरे कुछ पैसे कमाने के लिए उन्हें कई दिन तक पानी नहीं देते हैं, इसलिए आपको दूध की कटोरी खाली होती दिखती है। दूध से उन्हें नुकसान पहुंचता है।
सांप में कोई सामाजिक बंधन नहीं होता है। न ही उनमें हमलावरों को पहचाने और याद रखने की शक्ति होती है। सांप के बारे में बदला लेने की जो बातें फैलाई गई हैं, वो मिथक हैं।
सांपों के कान के पर्दे नहीं होते। उनके कान के अंदरूनी हिस्से होते हैं, जो न केवल जमीन से आने वाले कंपन को, बल्कि कम आवृत्ति वाली हवा में आने वाली आवाज को पकड़ने में सक्षम होते हैं। ऊंची आवाज सुनने में उन्हें कठिनाई होती है।