जब चूल्हा ठंडा हो जाए… तब समझ आता है गैस की कीमत, ज़रूरत क्या होती है…”कटनी से एक ऐसी खबर, जो सिर्फ खबर नहीं—घर-घर की तकलीफ बन चुकी है

जब चूल्हा ठंडा हो जाए… तब समझ आता है गैस की कीमत, ज़रूरत क्या होती है…”कटनी से एक ऐसी खबर, जो सिर्फ खबर नहीं—घर-घर की तकलीफ बन चुकी है

कटनी(YASHBHARAT.COM)। एक तरफ वो परिवार हैं जो बड़ी मुश्किल से एक सिलेंडर जुटा पाते हैं…

और दूसरी तरफ खुलेआम ये आवाज़ सुनाई दे रही है—

“जितने सिलेंडर चाहिए ले जाओ… बस ₹700 ज्यादा देना पड़ेगा…”

 

सोचिए…

जिस गैस से किसी घर में रोटी बनती है, उसी गैस पर अब मुनाफे का खेल खेला जा रहा है।

 

एक माँ की मजबूरी:

“बच्चों के लिए खाना बनाना है… पर हर बार इतना extra देना possible नहीं… क्या करें?”

 

शिकायतें हुईं… आवाज़ उठी…

लेकिन आज भी हालात वही हैं

ना जांच, ना कार्रवाई… बस चुप्पी।

 

और इसी चुप्पी ने कालाबाज़ारी करने वालों को और हिम्मत दे दी है।

 

ये सिर्फ गैस नहीं… भरोसे की भी काला बाज़ारी है

जहां सिस्टम से उम्मीद थी, वहां अब सिर्फ इंतज़ार है।

वर्तमान में हालात ये हैं कि शहर की सभी गैस एजेंसी के उपभोक्ताओं को गैस की काला बाजारी का सामना करना पड़ रहा है।

 

जनता की सीधी अपील:

“हमें राहत नहीं चाहिए… बस हमारा हक चाहिए।

कृपया इस खेल को रोका जाए… ताकि कोई भी घर भूखा ना सोए।”

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