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मिडिल ईस्ट में जंग तेज: ईरान के ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ हथियार बन सकते हैं गेम-चेंजर

मिडिल ईस्ट में जंग तेज: ईरान के ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ हथियार बन सकते हैं गेम-चेंजर

मिडिल ईस्ट में जंग तेज: ईरान के ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ हथियार बन सकते हैं गेम-चेंजर

मिडिल ईस्ट में जंग तेज: ईरान के ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ हथियार बन सकते हैं गेम-चेंजर, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बनाते हुए ऐसे एडवांस और नेक्स्ट जेनरेशन हथियार तैयार किए हैं, जो किसी भी बड़े युद्ध का रुख पलट सकते हैं। अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव की स्थिति में ईरान अब तक अपने कई घातक हथियारों को पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं कर रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इन्हें “आखिरी हथियार” के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

मिडिल ईस्ट में जंग तेज: ईरान के ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ हथियार बन सकते हैं गेम-चेंजर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास हाइपरसोनिक मिसाइलों से लेकर लॉन्ग-रेंज ड्रोन और हेवी पेलोड बैलिस्टिक मिसाइलों तक का बड़ा जखीरा मौजूद है। इनमें कुछ हथियार ध्वनि की गति से कई गुना तेज हैं और मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स को भी चकमा देने की क्षमता रखते हैं।

ईरान की Sejjil सीरीज की मिसाइलें 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार कर सकती हैं और इन्हें इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है। वहीं Fattah-2 हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल को ईरान का “ट्रम्प कार्ड” माना जा रहा है, जो अत्यधिक गति और मैन्यूवरेबिलिटी के साथ दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे सकता है।

इसके अलावा Khorramshahr-4 मिसाइल भारी वॉरहेड के साथ बड़े पैमाने पर तबाही मचाने में सक्षम है। Arash-2 जैसे लॉन्ग-रेंज कामिकाजे ड्रोन भी ईरान के पास मौजूद हैं, जो दुश्मन के अंदरूनी इलाकों तक सटीक हमले कर सकते हैं।

अगर युद्ध और बढ़ता है, तो ईरान समुद्री मोर्चे पर भी आक्रामक रुख अपना सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करने की धमकी पहले ही दी जा चुकी है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई गुजरती है। ऐसे में एंटी-शिप मिसाइल्स और सबमरीन हमले वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकते हैं।

ईरान की रणनीति सिर्फ सीधे हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए भी दबाव बना सकता है। लेबनान का हिज़्बुल्लाह, यमन के हूती और इराकी मिलिशिया समूह इस संघर्ष को और व्यापक बना सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलों का स्टॉक अभी भी मौजूद है। रूस और चीन से मिल रही तकनीकी और सैन्य मदद भी उसकी ताकत को बढ़ा रही है। ऐसे में अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ईरान के ये नेक्स्ट जेनरेशन हथियार क्षेत्र में बड़े स्तर पर तबाही और अस्थिरता का कारण बन सकते हैं।

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