अमृतसर। दशहरे के दिन रावण दहन के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में कई परिवार उजड़ गए। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने पिता और पति। हादसे के बाद भले ही मुआवजे का ऐलान हो गया हो लेकिन अब तक इसके जिम्मेदार तय नहीं हुए हैं। वहीं इस बीच हादसे के विरोध में मृतकों के परिजन उतर आए हैं। उन्होंने घटनास्थल के पास विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और धरना देने लगे।
#WATCH Amritsar: Protesters being chased away by police at Joda Phatak after they pelted stones on them when they (police) asked them to clear the railway tracks where they were sitting in protest against #AmritsarTrainAccident. #Punjab pic.twitter.com/tAPkOB5fc2
— ANI (@ANI) October 21, 2018
इस बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रेलवे ट्रैक क्लीयर करने के लिए कहा। नाराज प्रदर्शनकारी इससे भड़क गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसे देखते हुए पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। लोगों द्वारा किए गए पथराव में एक सुरक्षाकर्मी घायल हुआ है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हेड कॉन्स्टेबल अमरप्रीत सिंह के अनुसार लोग पत्थर मार रहे थे और इसके कारण उनके साथी की आंख में चोट आई है।
गुस्साए लोगों ने गेटमैन के केबिन पर किया हमला, तोड़फोड़
इससे पहले शुक्रवार की देर रात प्रदर्शनकारियों ने जोड़ा रेल फाटक पर गेटमैन के केबिन पर हमला कर दिया। किसी तरह से गेटमैन ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई। वहां से कुछ दूरी पर स्थित शिवाला बाग भाइया रेल फाटक पर बने केबिन को भी शनिवार दोपहर प्रदर्शनकारियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। दोनों जगहों पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। जोड़ा रेल फाटक पर गेटमैन के कमरे में टूटे हुए शीशे और सामान बिखरे पड़े हैं।
वहां पर आरपीएफ के जवान भी तैनात कर दिए गए हैं। शनिवार को कोई भी गेटमैन वहां नहीं तैनात था। वहां पर खड़े लोगों का कहना था कि अगर गेटमैन चाहता तो शुक्रवार का हादसा टल सकता था क्योंकि कुछ ही दूरी पर रेल ट्रैक पर लोग खड़े थे।
शनिवार को काफी संख्या में लोग रेलवे ट्रैक पर बैठे रहे। कोई भी नेता लोगों की अगुआई नहीं कर रहा था, फिर भी लोग डटे हुए थे।लोगों का कहना है कि यह हादसा रेलवे विभाग के कर्मचारियों की चूक है। इसके अलावा दशहरा आयोजकों व प्रशासन की भी लापरवाही है। आरपीएफ तथा पंजाब पुलिस के जवान रेलवे ट्रैक के आसपास तैनात हैं।

