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बेअदबी कानून पर चौतरफा घिरे भगवंत मान? अकाल तख्त साहिब के सामने नंगे पैर पहुंचे AAP के दिग्गज नेता

बेअदबी कानून पर चौतरफा घिरे भगवंत मान? अकाल तख्त साहिब के सामने नंगे पैर पहुंचे AAP के दिग्गज नेता

अमृतसर/चंडीबेअदबी कानून पर चौतरफा घिरे भगवंत मान? अकाल तख्त साहिब के सामने नंगे पैर पहुंचे AAP के दिग्गज

नेतागढ़। पंजाब की राजनीति और धार्मिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए बेअदबी विरोधी नए कानून को लेकर मचे घमासान के बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) के सभी सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों ने सोमवार को ‘श्री अकाल तख्त साहिब’ के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखा।

AAP नेताओं ने पांच सिंह साहिबान (सिख पुजारियों) के समक्ष नंगे पैर उपस्थित होकर एक आधिकारिक पत्र (स्पष्टीकरण) सौंपा। इस पत्र में सरकार ने साफ किया है कि “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026” का मकसद किसी धार्मिक संस्था के अधिकारों में दखल देना नहीं, बल्कि बेअदबी के दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है।

SGPC की पुरानी मांग का हवाला, कानून को और सख्त बनाने की दलील

अकाल तख्त साहिब को सौंपे गए पत्र में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदु सामने रखे हैं: बेअदबी कानून पर चौतरफा घिरे भगवंत मान? अकाल तख्त साहिब के सामने नंगे पैर पहुंचे AAP के दिग्गज नेता

  • 2007-2008 का हवाला: पत्र में याद दिलाया गया कि साल 2007 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने खुद पंजाब सरकार से बेअदबी रोकने के लिए कड़े कानून की मांग की थी, जिसके बाद 2008 में मूल कानून बनाया गया था।

  • सजा को किया सख्त: सरकार ने दलील दी है कि पंजाब में अतीत में हुई बेअदबी की दर्दनाक घटनाओं और दोषियों को सजा न मिलने की जनभावनाओं को देखते हुए इस कानून में संशोधन कर इसे और अधिक सख्त (उम्रकैद और भारी जुर्माने का प्रावधान) बनाया गया है।

  • संशोधन के लिए तैयार: ‘आप’ विधायकों ने लिखा कि वे श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्च मर्यादा का पूर्ण सम्मान करते हैं। अगर इस कानून में कोई भ्रम या कमी है, तो सरकार अकाल तख्त साहिब और सिख विद्वानों के सुझावों के आधार पर इसमें सुधार या संशोधन करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सीएम भगवंत मान व्यक्तिगत रूप से नहीं हुए तलब, भेजा लिखित जवाब

इस धार्मिक सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान व्यक्तिगत रूप से अकाल तख्त के सामने पेश नहीं हुए, क्योंकि उन्हें निजी तौर पर तलब नहीं किया गया था। हालांकि, उन्होंने पत्र के माध्यम से अपना लिखित स्पष्टीकरण और हाल ही में एक कथित विवादित वीडियो को लेकर अपना पक्ष भेजा है। सीएम मान ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी और उन्हें बदनाम करने की साजिश बताया है।

अकाल तख्त का कड़ा रुख: कानून को पास करने से पहले सिख धार्मिक संस्थाओं (अकाल तख्त और SGPC) को भरोसे में न लेने पर अकाल तख्त ने गहरी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद सभी सिख विधायकों को 29 जून को तलब किया गया था। इस मामले में गैर-सिख मंत्रियों से भी लिखित जवाब मांगा गया है।

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