देहरादून/नई दिल्ली । उत्तराखंड के विकास पुरुष और पूर्व CM मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का 91 वर्ष की उम्र में निधन; पीएम मोदी और सीएम धामी ने जताया गहरा शोकउत्तराखंड की राजनीति के एक स्वर्णिम अध्याय का आज अंत हो गया। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बेहद वरिष्ठ नेता और भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (रिटायर) का लंबी बीमारी के बाद आज मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से उम्र संबंधी व हृदय की समस्याओं के चलते देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे।
खंडूरी के निधन की पुष्टि उनकी बेटी और उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने की। उनके परिवार में पत्नी अरुणा, बेटी रितु और एक बेटा मनीष खंडूरी हैं। उनके निधन की खबर से पूरे देश और विशेषकर उत्तराखंड राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।
केंद्रीय मंत्री और सीएम के रूप में उनका कार्यकाल हमेशा प्रेरित करेगा— पीएम मोदी
भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा:
प्रधानमंत्री का शोक संदेश: “खंडूरी जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत तक उन्होंने देश को जो बहुमूल्य योगदान दिया, उसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका बेदाग कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है।”
सीएम धामी ने कहा— ‘सुशासन और ईमानदारी का अपूरणीय नुकसान’
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। सीएम धामी ने कहा कि जनरल खंडूड़ी ने भारतीय सेना में रहते हुए अनुशासन का जो अद्वितीय उदाहरण पेश किया, उसे उन्होंने राजनीति में भी लागू किया। उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यशैली की मजबूत नींव रखने का श्रेय खंडूड़ी जी को ही जाता है। उनकी सादगी और स्पष्टवादिता हमेशा हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी।
अटल जी के थे बेहद भरोसेमंद, देश में बिछाया था ‘हाईवे का जाल’
1 अक्टूबर 1934 को जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद 1990 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। खंडूरी को अटल जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था।
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पहली बार सांसद: वह साल 1991 में पहली बार गढ़वाल संसदीय सीट से लोकसभा सांसद चुने गए और दो साल के भीतर ही उन्हें संसद में भाजपा का मुख्य सचेतक (Chief Whip) बना दिया गया था।
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सड़कों की बदली शक्ल: साल 1999 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी, तब खंडूरी को देश का सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। उनके ही कार्यकाल में देश में ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों (Highways) के आधुनिकीकरण और सड़कों की शक्ल बदलने का ऐतिहासिक काम शुरू हुआ था।
दो बार संभाली उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कमान
उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद जब भाजपा के भीतर राजनीतिक उठापटक और गुटबाजी बढ़ने लगी, तब पार्टी ने जनरल खंडूरी की बेदाग और कड़क छवि पर भरोसा जताया। वह राज्य के चौथे मुख्यमंत्री बने:
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पहला कार्यकाल: साल 2007 से 2009 तक उन्होंने राज्य की कमान संभाली।
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दूसरा कार्यकाल: साल 2011 में पार्टी ने उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया और वह 2012 तक इस पद पर रहे। ‘खंडूरी हैं जरूरी’ का नारा उत्तराखंड की सियासत में आज भी बेहद मशहूर है।
एक सैन्य अधिकारी से लेकर देश के केंद्रीय मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री तक, भुवन चंद्र खंडूरी का पूरा जीवन वित्तीय शुचिता, कड़े फैसलों और सुशासन के लिए याद किया जाएगा।

