Site icon Yashbharat.com

Upchunav In MP: चुनाव में हिंसा हुई तो गोली खुद बताएगी चलाने वाले का नाम

yashbharat breaking

MP Election । चंबल में गोलियों की गूंज जल्द पुरानी बात हो जाएगी। भिंड एसपी मनोज कुमार सिंह ने जिले में बंदूक की हिंसा रोकने विशेष प्रोग्राम तैयार किया है।

इस प्रोग्राम से हिंसा में बंदूक का इस्तेमाल होगा तो चलाई गई गोली का खोखा खुद चलाने वाले का नाम और पता बता देगा।

दरअसल जिले में लाइसेंसी हथियारों पर खरीदे गए कारतूस पर क्यूआर कोडिंग का काम शुरू किया गया है।

इसके जरिए प्रत्येक कारतूस पर लाइसेंसधारी के नाम पते के साथ हथियार और लाइसेंस संबंधी जानकारी कारतूस पर अंकित की जा रही है। अब ऐसे में कारतूस का उपयोग हिंसा में हुआ तो चलाने वाला पकड़ में आ जाएगा।

मेहगांव और गोहद के उपचुनाव के मद्देनजर इसकी शुरुआत की जा रही है।

ऐसे काम करेगा कारतूस पर क्यूआर कोडिंग प्रोग्रामएसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने द ट्रेसेबिलिटी ऑफ बुलेट प्रोग्राम शुरू किया है।

आर्म्स लाइसेंसी से संबंधित थाने की पुलिस उसके पास मौजूद कारतूस एकत्रित करेगी। पुलिस के विशेष प्रिंटर के जरिए इन कारतूसों पर क्यूआर कोडिंग की जाएगी।

भारत सरकार के शस्त्र संबंधी एनडीएएल-

एलिस पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इसके जरिए प्रत्येक कारतूस पर अलग यूनिक आइडेंटीफिकेशन नंबर (यूआइएन) रहेगा।

इसके साथ इस क्यूआर कोड में शस्त्र लाइसेंसी का नाम, पुलिस स्टेशन का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस की वैद्यता कब से कब तक, वर्तमान पता, शस्त्र नंबर, शस्त्र और कॉन्टैक्ट नंबर का पूरा ब्योरा रहेगा।

क्यूआर कोडिंग के बाद पुलिस उन कारतूसों को संबंधित लाइसेंसधारी को वापस देगी।

 

गोहद, मेहगांव से की जा रही शुरुआतजिले में द ट्रेसेबिलिटी ऑफ बुलेट प्रोग्राम की शुरुआत उपचुनाव से की जा रही है। एसपी का कहना है कि वे सबसे पहले मेहगांव और गोहद में शस्त्र लाइसेंसियों के पास से कारतूस एकत्रित कराएंगे।

इन कारतूसों को क्यूआर कोडिंग के बाद वापस दिया जाएगा। इस तरह से पुलिस की गोहद और मेहगांव उपचुनाव में हिंसा को रोकने की तैयारी है। एसपी का कहना है कि पुलिस के कारतूसों से इसकी शुरुआत की जा चुकी है।

 मैं पिछले 2 वर्ष से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हूं। द ट्रेसेबिलिटी ऑफ बुलेट प्रोग्राम का मकसद भिंड जिले में बंदूक की हिंसा रोकना है। गोहद-मेहगांव के उपचुनाव से इसकी शुरुआत की जा रही है। – मनोज कुमार सिंह, एसपी, भिंड

Exit mobile version