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शक्ति से सृजन’ अभियान के तहत मातृशक्ति ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश,हरदुआ में ‘नवांकुर सखी प्रकृति-संस्कृति संरक्षण कार्यक्रम’ आयोजित, कलश यात्रा निकालकर किया माटी, जल स्रोत और वृक्ष पूजन

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‘शक्ति से सृजन’ अभियान के तहत मातृशक्ति ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश,हरदुआ में ‘नवांकुर सखी प्रकृति-संस्कृति संरक्षण कार्यक्रम’ आयोजित, कलश यात्रा निकालकर किया माटी, जल स्रोत और वृक्ष पूज

कटनी। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, विकासखंड कटनी के तत्वावधान में सेक्टर क्रमांक-2 कैलवारा कला के अंतर्गत ग्राम हरदुआ में 15 अक्टूबर को ‘शक्ति से सृजन’ अभियान के तहत ‘नवांकुर सखी प्रकृति-संस्कृति संरक्षण कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति हरदुआ के सहयोग तथा मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम की परामर्शदाता श्रीमती संयोगिता मिश्रा के समन्वय से आयोजित कार्यक्रम में मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मातृशक्तियों द्वारा देवी गीतों और भजनों की भक्तिमय प्रस्तुति के साथ हुआ। इस अवसर पर जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक बालमुकुंद मिश्र ने ‘शक्ति से सृजन’ अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल और पर्यावरण का संरक्षण हम सभी का सामाजिक एवं नैतिक दायित्व है। ऐसे आयोजनों से आमजन, विशेषकर महिलाओं में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी से इन प्रयासों को जनअभियान का स्वरूप दिया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान शक्ति स्वरूपा कन्याओं ने आकर्षक गरबा नृत्य की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनों का मन मोह लिया। इसके बाद मातृशक्तियों ने भव्य कलश यात्रा निकाली। आयोजन में माटी पूजन, जल स्रोत पूजन और वृक्ष पूजन कर प्रकृति के प्रति आस्था व्यक्त की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और हरित भविष्य का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती दीपा सिंह, भाजपा महिला मोर्चा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष श्रीमती निहारिका गौतम, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष अनिल गौतम, परामर्शदाता श्रीमती संयोगिता मिश्रा, छात्रा भावना गौतम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती गौतम सहित प्रस्फुटन समिति के सदस्य, विभिन्न स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, भजन मंडलियों के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। आयोजन ने प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का संदेश दिया।

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