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कटनी से नीलकंठेश्वर धाम तक पहुंची विशाल हजारों शिवभक्तों की कांवड़ पदयात्रा,शिवभक्ति में डूबे हजारों हृदय”पढ़खुरी महादेव धाम में हुआ जलाभिषेक

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कटनी से नीलकंठेश्वर धाम तक पहुंची विशाल हजारों शिवभक्तों की कांवड़ पदयात्रा,शिवभक्ति में डूबे हजारों हृदय”पढ़खुरी महादेव धाम में हुआ जलाभिषे

कटनी-श्रावण मास की पावन बेला में रविवार को कटनी नगर में आस्था और श्रद्धा का ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को शिवमय कर दिया। बागेश्वर धाम शिष्य मंडल, कटनी के तत्वावधान में आज 3 अगस्त रविवार को नीलकंठेश्वर धाम, पढ़खुरी की ओर निकली विशाल कांवड़ यात्रा ने धार्मिक ऊर्जा का एक ऐसा उत्सव रचा, जो नगरवासियों की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेगा। यात्रा के मुख्य सूत्रधार रहे विजयराघवगढ़ विधानसभा के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक, जिनके मार्गदर्शन, प्रेरणा और संगठनात्मक कौशल से इस ऐतिहासिक आयोजन की रूपरेखा बनी। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक यात्रा रहा, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल भी बना। 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा, नंगे पांव भक्ति का अद्भुत उदाहरण सुबह 7 बजे बागेश्वर धाम आश्रम, पुरैनी से आरंभ हुई कांवड़ यात्रा में हजारों शिवभक्तों ने भाग लिया। सभी ने विशेष पूजन के उपरांत माँ नर्मदा का पवित्र जल भरा और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ नंगे पांव 18 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा शुरू की। कांवड़ यात्रा जागेश्वर धाम, कन्हवारा होते हुए नीलकंठेश्वर धाम, पढ़खुरी पहुँची, जहाँ श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर परिवार, समाज और राष्ट्र की समृद्धि की प्रार्थना की। तब हर तरफ “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। यात्रा के दौरान जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए। पढ़खुरी ग्राम के नीलकंठेश्वर धाम मे यात्रा का समापन हुआ। प्रशासन, स्थानीय ग्रामीणजन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिलकर जल वितरण, विश्राम स्थल और चिकित्सा व्यवस्था की। यह सहयोग इस यात्रा को सफल बनाने की आत्मा बन गया। रास्ते में उपस्थित ग्रामीणों ने कांवड़ियों का स्वागत कर भक्ति भाव का अनुपम परिचय दिया। नीलकंठेश्वर धाम, पढ़खुरी में संपन्न हुई यह दिव्य कांवड़ यात्रा न केवल श्रावण मास की धार्मिक परंपराओं का अनुपम उदाहरण बनी, बल्कि समाज में एकता, सेवा और श्रद्धा के अद्वितीय भाव को भी जागृत कर गई। विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के कुशल मार्गदर्शन में चार दिवसीय आयोजन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब जनप्रतिनिधि धर्म और संस्कृति के साथ खड़े होते हैं, तब समाज नई ऊर्जा से भर उठता है।

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