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श्रीमद्भागवत में संत श्रीमुरारीदास जी महाराज के उद्गार: प्रभु से बढ़कर कोई और सुख और सम्पदा नहीं

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रीठी। विकासखंड रीठी के ग्राम खम्हरिया नं.1 में बाबा हरिदास जी के बंगले में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण के द्वितीय दिवस कथा में श्री वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास शीतल संत श्री मुरारीदास जी महाराज ने अमर कथा और शुकदेवजी के जन्म का वृतांत का विस्तार से वर्णन किया गया।

कथा वाचक श्री मुरारीदास ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि आप सब पर बाबा हरिदास जी की कृपा है, जिसकी वजह से आप आज कथा का आनंद ले रहे है। श्रीमद भगवत कथा का रसपान कर पा रहें हैं क्योंकि जिन्हें गोविन्द प्रदान करते है जितना प्रदान करते है उसे उतना ही मिलता है।

कथा में यह भी बताया की अगर आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते हैं, कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आए, कुछ सीखने के उद्देश्य से, कुछ पाने के उद्देश्य से आएं। मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा ध्यान संसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है।

मानव जीवन का उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति शाश्वत है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो हमारे लिए इससे प्रभु से बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है। कथा आयोजक समिति के सदस्यों द्वारा बताया गया कि प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से क्षेत्रीय श्रीरामचरितमानस मंडल के सदस्यों द्वारा प्रतिदिन मानस पथ व भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।इस अवसर पर कथा श्रवण हेतु ग्रामवासियों के अलावा क्षेत्र के आसपास के भक्त श्रद्धालुओं की भीड़ दिन प्रतिदिन संख्या बढ़ रही है।

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