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पैसों की बात फोन पर थोड़ी होती है…वायरल वीडियो ने उधेड़ी खाकी की परतें रिश्वत की खुली सौदेबाज़ी स्वीकारता ASI निलंबित

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कटनी। कानून के रखवाले ही जब कानून को रेट कार्ड पर तौलने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी है। जिले के बहोरीबंद थाने से सामने आए एक वायरल वीडियो ने कटनी पुलिस की कथित सख्ती और ईमानदारी के दावों की पोल खोल दी है। वीडियो में थाना बहोरीबंद में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) संतलाल गोटिया न केवल रिश्वत मांगने की बात स्वीकार करता दिख रहा है, बल्कि मुचलके पर रिहाई के बदले 5000 और 3000 रुपये लेने की सौदेबाज़ी खुलेआम करता नजर आ रहा है।

वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ASI संतलाल गोटिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र कटनी में पदस्थ कर दिया। एसपी कार्यालय के अनुसार, ASI का आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के प्रतिकूल, असंनिष्ठ, गंभीर कदाचरण एवं आशोभनीय पाया गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती—बल्कि यहीं से यह मामला और ज्यादा विस्फोटक हो जाता है।

“पैसों की बात फोन पर थोड़ी होती है…”

वायरल वीडियो में ASI यह कहते भी सुने जा रहे हैं कि “पैसों की बात फोन पर थोड़ी होती है”—यह कथन किसी एक अधिकारी की नहीं, बल्कि थाने के भीतर पनप चुकी भ्रष्ट मानसिकता का आईना है। वीडियो यह भी उजागर करता है कि फरियादियों को जानबूझकर घंटों बैठाया जाता था, मामलों को लटकाने के लिए विलंबकारी नीति अपनाई जाती थी और फिर राहत या कार्रवाई के बदले रकम की मांग की जाती थी। “टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी”—सबसे बड़ा सवाल वीडियो में ASI द्वारा बोला गया एक वाक्य आज पूरे पुलिस तंत्र पर भारी पड़ रहा है—
“टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी।” यह वाक्य सीधे-सीधे थाना प्रभारी (TI) पर गंभीर आरोप है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ASI को निलंबित कर देने के बाद भी थाना प्रभारी पर न तो कोई जवाब-तलब हुआ, न ही किसी प्रारंभिक जांच की सार्वजनिक घोषणा। यही चुप्पी अब सवाल बनकर खड़ी है क्या कार्रवाई सिर्फ नीचे के स्तर तक सीमित है? क्या कमांड स्तर पर संरक्षण दिया जा रहा है?
क्या निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है? कानून या सौदा—एक को चुनना होगा यदि कैमरे के सामने एक ASI इतनी बेखौफ होकर रिश्वत की बात स्वीकार कर रहा है, तो बिना कैमरे के रोज़ कितने सौदे तय होते होंगे, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।

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