शरीर पर बर्थमार्क का राज़: सामुद्रिक शास्त्र कहता है, ये बताते हैं पिछले जन्म के संकेत।Birth Mark:शरीर पर बर्थमार्क का राज़: सामुद्रिक शास्त्र कहता है, ये बताते हैं पिछले जन्म के संकेत। लोगों के शरीर पर बर्थमार्क मौजूद होता है. ये एक आम बात मानी जाती है, लेकिन व्यक्ति के शरीर पर मौजूद इस निशान का बड़ा ज्योतिषीय महत्व बताया गया है. व्यक्ति के शरीर पर मौजूद बर्थमार्क उसके जीवन को खास रूप से प्रभावित करते हैं. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, जिस तरह व्यक्ति के शरीर पर तिल होते हैं, ठीक वैसे ही बर्थमार्क का भी महत्व है.
बर्थमार्क से व्यक्ति के स्वभाव, गुण, व्यक्तित्व और जीवन के उतार-चढ़ाव के बारे में पता लगाया जा सकता है. हालांकि, इन निशानों को पिछले जन्म से भी जोड़ा जाता है. ज्योतिष और पूर्व जन्म के पैटर्न का अध्यनन करने वाले ज्योतिषियों के अनुसार, जन्म चिन्ह यानी बर्थमार्क की जगह आत्मा द्वारा अपने साथ लाई गई किसी खास अनसुलझे रहस्य को दर्शाती है।
60,000+ मरीज किडनी ट्रांसप्लांट के इंतजार में, अंगदान की कमी बनी बड़ी चुनौती; महाराष्ट्र में सबसे लंबी वेटिंग, दिल्ली में सबसे ज्यादा सफल ऑपरेशन
गर्दन या गले पर बर्थमार्क
अगर किसी के गर्दन या गले पर बर्थमार्क होता है, तो ऐसा माना जाता है कि ऐसे लोग पिछले जन्म में भावनात्मक और शारीरिक रूप से शांत कराए गए हों. गर्दन या गले के बर्थमार्क को आवाज खोने के डर से भी जोड़ा जाता है.
छाती या हृदय पर बर्थमार्क
छाती या हृदय पर बर्थमार्क होना आत्मा पर गहरे घाव, पिछले जन्म के विश्वासघात, तनावपूर्ण रिश्तों या दुख की वजह हो सकता है. ये भावनात्मक कमजोरी, भय और हृदय के पास किसी निशान से संबंधित होता है.
पेट या नाभि के पास बर्थमार्क
पेट या नाभि के आसपास बर्थमार्क दर्शाता है कि पिछले जन्म में व्यक्ति को जीवन रक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा हो, परित्याग या किसी अपने को खोना पड़ा हो.
पीठ के ऊपरी भाग पर बर्थमार्क
पीठ के ऊपरी भाग पर बना बर्थमार्क ज्योतिषियों के अनुसार, ये दर्शाता है कि पिछले जन्म में व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था. पीठ के ऊपरी भाग का बर्थमार्क विश्वासघात को भी दर्शाता है.
पैरों या पंजों पर बर्थमार्क
पैरों या पंजों पर किसी भी तरह का बर्थमार्क दिशा या स्थिरता खोने की चिंता की ओर संकेत करता है. जिसके पैरों या पंजों पर बर्थमार्क होता है, उसके लिए माना जाता है कि उसे पिछले जन्म में विस्थापन, निर्वासन या जबरदस्ती यात्रा करनी पड़ी हो.
कान या खोपड़ी पर बर्थमार्क
कान या खोपड़ी पर बर्थमार्क का होना असामान्य हालातों को दर्शाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, जिन लोगों के कान या खोपड़ी पर बर्थमार्क होता है, उसमें पिछले जन्म से ही आध्यात्मिक समझ अधिक होती है.
-
इस साल मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी? जानिए तिथि, पुण्यकाल, दान और खास संयोग व धार्मिक महत्व -
माघ मेले का पहला स्नान पर्व: कड़कड़ाती ठंड के बीच पौष पूर्णिमा पर संगम में उमड़ा आस्था का महासैलाब -
Christmas 2025 Gift Guide: हर उम्र के लिए परफेक्ट गिफ्ट आइडियाज – बच्चों से कपल्स तक -
मोबाइल और राहु का संबंध: बार-बार टूटते फोन का चौंकाने वाला कारण, जानिए इसका रहस्य -
अमर अवतार परशुराम की सबसे हैरान करने वाली घटना: माता का वध और पुनर्जीवन -
घर में धन और खुशहाली नहीं आ रही? हो सकती है मेन गेट की ये 5 वास्तु गलतियां! -
Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे नवरात्र, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त -
Paush Amavasya 2025: दिसंबर में कब पड़ेगी साल की अंतिम अमावस्या? जानें तिथि, मुहूर्त, पूजा-विधि और महत्व -
हरिद्वार अर्द्धकुंभ 2027: 3 अमृत स्नान और 10 कुल स्नान, अमृत स्नान की तारीखें घोषित, अखाड़ों की व्यवस्था तय -
5 दिसंबर के बाद मुहूर्त नहीं, फिर सीधे फरवरी में होंगी शादियां; 14 जनवरी तक रहेगा खरमास -
सफला एकादशी 2025: व्रत कब और कैसे रखें, पाएं सफलता और समृद्धि -
नए साल में मंगल का मंत्रीमंडल, भारत और दुनिया में क्या होगा बदलाव; 2026 में कौन सा ग्रह करेगा शासन? -
Mangal Gochar 2025: किन राशि वालों पर बढ़ेगी टेंशन? जानें मंगल के गोचर का 12 राशियों पर शुभ- अशुभ असर -
साल 2026 में दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण: जानें कब लगेंगे और क्या रखें सावधानियां -
अयोध्या में कलश यात्रा से ध्वजारोहण महोत्सव का शुभारंभ, पीएम मोदी 25 को शामिल होंगे -
कर्ज से तुरंत मुक्ति! हर बुधवार करें ये शक्तिशाली गणेश मंत्र जाप -
विवाह पंचमी 2025: इस दिन के शुभ योग और पूजा विधि से जानें क्यों है यह दिन खास -
Marriage Astrology टिप्स: केवल मुहूर्त नहीं, इन ग्रहों का शुभ होना जरूरी है शादी की खुशियों के लिए -
मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना: द्वारका-सोमनाथ यात्रा के लिए आवेदन शुरू, कटनी को मिले 250 बर्थ-28 नवंबर आखिरी तारीख -
सीता जन्म कहानी: जनक नंदिनी की संतान धरती से कैसे आई?
