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शहर में बढ़ती जा रही घरेलू गैस सिलेंडर की समस्या, कालाबाजारी भी बढ़ी, 1200 से 1500 रूपए तक वसूले जा रहे दाम, प्रशासन के दावे हवा में

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कटनी(YASHBHARAT.COM)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे शहर में गैस की भारी किल्लत और सिलेंडर की कालाबाजारी बढ़ गई है। गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं, जबकि कलेक्टर आशीष तिवारी का दावा है कि आपूर्ति पर्याप्त है। इस संकट के चलते लोगों को लकड़ी और कोयले का उपयोग करने मजबूर होना पड़ रहा है। उधर कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत के कारण होटल, रेस्टारेंट, चाय, नास्ते की होटलों में भी फिर से कोयला की भट्ठी तैयार होने लगी है। बहरहाल इजरायल, अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच गैस सिलेंडर को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है। लोग ब्लैक में सिलेंडर खरीदकर रख रहे हैं। उधर जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं कुछ लोग अभी से आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर के साथ शहर में भी एलपीजी की किल्लत बढ़ती जा रही है। गैस सिलेंडर एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें लगना शुरू हो गई हैं। इसके अलावा घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी होने लगी है। कुछ लोग घरेलू गैस सिलेंडर के अभी से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। वहीं कॉमर्शियल सिलेंडर भी ब्लैक में बिकने लगा है। इतना ही नहीं कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक से कुछ होटलों और रेस्टोरेंट्स में इंडक्शन पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन ने कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम को लागू किया है लेकिन कालाबाजारियों पर इसका असर नहीं पड़ा है। इस खेल में प्राइवेट गैस एजेंसी संचालक, कर्मचारी और दलाल भी शामिल हैं। इसके अलावा गैस की अवैध रिफिलिंग करने वाले भी मौके का फायदा उठा रहे हैं। कुल मिलाकर गैस सिलेंडर की किल्लत होने से इसकी कालाबाजारी बढ़ गई है। 940 रुपए का गैस सिलेंडर ब्लैक में बेचा जा रहा है और जरूरत मंद लोगों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। वहीं कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है तथा इसके दाम भी निर्धारित कीमत से अधिक वसूले जा रहे हैं। शहर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के बीच इसके दाम भी आसमान छू रहे हैं। शहर की कुछ एजेंसियों में दिन-दिन भर लाइन में खड़े रहने पर भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। लोगों का दावा है कि इन सबके बावजूद 940 रुपए वाला सिलेंडर 1500 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर भी 3500 रुपए में आसानी से उपलब्ध है। घरेलू सिलेंडरों के लिए भी बुकिंग में समस्या आ रही है। जंग से पहले जहां घरेलू सिलेंडर घरों में डिलीवर होता था। अब हालात ये हैं कि लोग एजेंसियों के सामने सिलेंडर लेकर लाइनों में खड़े हैं। फिर भी उन्हें गैस नहीं मिल रही। घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी पहले जो 1-2 दिन में हो जाती थी, अब एक हफ्ते तक इंतजार करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हैं।

संकट से निपटने प्रशासन के कदम भी हवा में

उधर दूसरी तरह प्रशासन के उठाए गए कदमों को एजेंसी संचालक हवा में उड़ा रहे हैं तथा गैस एजेंसी संचालक, कर्मचारी और दलाल प्रशासन के कदमों को हवा में उड़ाते हुए अभी से आपदा में अवसर की तलाश में जुट गए हैं। जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में घरेलू गैस सिलेंडर और कामर्शियल गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और अधिक बढ़ सकती है।

गैस की समस्या के प्रमुख कारण और स्थिति

आपूर्ति में रुकावट-: मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण आयात प्रभावित हुआ है, जिससे एलपीजी शिपमेंट में देरी हो रही है।

पैनिक बुकिंग-: कमी की अफवाहों के कारण लोग जरूरत से ज़्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे बुकिंग का आंकड़ा सामान्य से काफी ज्यादा हो गया है।

कीमतों में वृद्धि-: भारत में 7 मार्च 2026 से घरेलू सिलेंडर पर 60 रूपए और कमर्शियल पर 115 रूपए तक की बढ़ोतरी की गई है।

व्यावसायिक असर-: रेस्तरां और होटलों में कमर्शियल गैस की कमी से भोजन की कीमतों में 10 प्रतिशत सरचार्ज लग रहा है।

उपभोक्ताओं को सलाह

-: घबराहट में बुकिंग न करें।

-: केवल आवश्यकता होने पर ही सिलेंडर बुक करें।

-: गैस की बचत करें और वैकल्पिक कुकिंग के तरीकों जैसे इंडक्शन का उपयोग करें।

-: सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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