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अतीत के झरोखे से-1959 मैं पहली बार मनाया गया चेट्रीचंड महोत्सव, 51 रुपए आया था खर्च,सिन्धु सभ्यता एवं संस्कृति का प्रतीक भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव पर विशेष

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1959 मैं पहली बार मनाया गया चेट्रीचंड महोत्सव,
51 रुपए आया था खर्च,सिन्धु सभ्यता एवं संस्कृति का प्रतीक भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव पर विशे

 

कटनी। चेट्रीचंडू पर्व जो भगवान श्री झूलेलाल जी के जन्मदिवस के साथ-साथ सिंधु संस्कृति की हमेशा याद दिलाता है सिन्धी संस्कृति जो अति प्राचीन मानी गयी है। उसका प्रभाव हडप्पा मोहन जोदडो इसके प्रत्यक्ष उदाहरण है एवं चेट्रीचंड्र पर्व मनाने के साथ साथ सिन्धु संस्कृति एवं सभ्यता का कुछ अंश आज भी इस पर्व पर दिखाई देता है। 1947 में जब हमारे देश को स्वतंत्रता मिली और हिन्दुस्तान पाकिस्तान दो अलग अलग राष्ट्र बने। सिन्ध में बसे जो सिन्धु वासी एवं उनको अपना वतन सिन्ध छोडना पडा और नए राष्ट्र भारत में आकर भारत को अपनी मातृभूमि बनाया। एवं हम अपने इष्ट देव भगवान झूलेलाल जी को भूले नहीं थे उनकी स्तुति करते आ रहे है! और हम लोगों को रोजगार के साथ साथ अपनी संस्कृति , भाषा को भी भूले नहीं थे .समाज सेवी संजय खूबचंदानी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कटनी में भगवान श्री झूलेलाल जी का जन्मोत्सव मनाने की शुरूआत स्टेशन रोड के व्यापारीयों सर्व श्री स्व. गिरधारीलाल खूबचंदानी स्व. सच्चानंद लालवानी, स्व. श्रीचंद पमनानी, स्व. सहजराम, स्व.पमनदास माखीजा, स्व. किशनचंद पोपटानी, किशनचंद मूरजमल इत्यादी की पहल पर सन 1959 में हुई। भगवान श्री झूलेलाल जी का जब प्रथमबार जन्मोत्सव मनाया गया उस समय मात्र 51 रू. का खर्च हुआ था प्रारंभ में तो सिर्फ बहराणा साहब (अखण्ड ज्योति ही निकाली जाती थी) समय बीतता गया नौजवानों के नेतृत्व में नई-नई गतिविधियां आने लगी जिसका पूरा श्रेय स्व. गिरधारीलाल खूबचंदानी को जाता है जिसने अपना काफ़ी समय सामाजिक संस्थायों तथा चेट्रीचंडू पर किस प्रकार का आयोजन किया जाए मैं लगा दिया, चेट्रीचंड महोत्सव पर अब बात यह सामने आयी कि चेट्रीचंडू तो मानते है पर उसका क्या महत्व है यहां के लोगो को कैसे पता चले इसके लिए चेट्री चण्ड्र महोत्सव पर बुद्धिजीवियों व जन प्रतिनिधियों की वार्तालाप स्टेशन रोड रेस्ट हाउस क्र.2 मैं होने लगी व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होने लगे और सन् 1978 मैं गुरुनानक वार्ड स्तिथ श्री झूलेलाल मंदिर का निर्माण हुआ और सभी कार्यक्रम वहाँ पर संचालित होने लगे एवं धीरे – धीरे, चेट्रीचड्र महोत्सव को और विशाल रूप देने के लिए एवं संगठन को मज़बूत करने के लिए और भव्यता प्रदान होती गई ।

संजय ख़ूबचंदानी कटनी ( एमपी)

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