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देश का पहला जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर: अब सिक्किम की ‘जैविक मछली’ मचाएगी धूम, केंद्र ने जारी की SOP

जैविक मछली

सिक्किम (सोरेंग): जब भी ‘जैविक’ (Organic) खेती या उत्पादों की बात होती है, तो आमतौर पर दिमाग में गेहूं, चावल, ताजे फल और हरी सब्जियां ही आती हैं। लेकिन अब भारतीय कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। अब केवल अनाज और सब्जियां ही नहीं, बल्कि जैविक मछली भी आपकी थाली का हिस्सा बनने जा रही है।

सिक्किम के सोरेंग जिले में भारत का पहला जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर (Organic Fisheries Cluster) तैयार किया गया है। केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक पहल को वैश्विक पहचान दिलाने और जैविक मछली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित करने के लिए आधिकारिक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है।

🛑 बिना प्रमाण पत्र नहीं मिलेगी जैविक मछली की मान्यता

केंद्र सरकार द्वारा जारी SOP के अनुसार, किसी भी मछली को केवल मौखिक दावों के आधार पर ‘जैविक’ नहीं माना जाएगा। जैविक मछली पालन करने वाले किसानों को बीज, प्राकृतिक चारा, तालाब में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री, बीमारियों और उनके उपचार का पूरा पारदर्शी रिकॉर्ड बनाए रखना होगा। गहन जांच-पड़ताल और सत्यापन के बाद ही आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।

इसका मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालकों को प्रीमियम और उच्च मूल्य वाले राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच दिलाना है।

🌊 जैविक मत्स्य पालन के कड़े नियम और मानक

मछली पालन को पूरी तरह जैविक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त दिशानिर्देश तय किए हैं:

🌿 पूरी तरह प्राकृतिक और रसायनों से मुक्त चारा

मछलियों के प्राकृतिक भोजन (प्लवक) को बढ़ावा देने के लिए तालाब में जैविक गोबर, मुर्गी की खाद और वर्मी कंपोस्ट का उपयोग किया जा सकता है।

अतिरिक्त आहार की आवश्यकता होने पर किसानों को केवल प्रमाणित जैविक फीड (Organic Feed) का ही इस्तेमाल करना होगा। यदि किसान स्वयं चारा तैयार करते हैं, तो उसमें प्रयुक्त सभी सामग्रियां जैविक स्रोतों से होनी चाहिए। सिंथेटिक अमीनो एसिड, ग्रोथ प्रमोटर्स और आनुवंशिक रूप से संशोधित सामग्री का उपयोग पूरी तरह से वर्जित है।

💊 बीमारियों से बचाव और जैविक उपचार प्रक्रिया

जैविक मत्स्य पालन में एंटीबायोटिक दवाओं और हानिकारक रसायनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।

मछलियों को बीमारियों से बचाने के लिए पानी की स्वच्छता और नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है। किसी रोग के संक्रमण पर केवल निर्धारित मानकों के तहत हर्बल और होम्योपैथिक दवाओं का ही उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा, सामान्य और जैविक मछलियों को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग रखना अनिवार्य होगा।

⏳ जैविक परिवर्तन अवधि (Conversion Period)

सामान्य तालाब को जैविक तालाब में बदलने के लिए एक निर्धारित अवधि पूरी करनी होगी:

  1. सुखाए जाने योग्य तालाब: 12 महीने की परिवर्तन अवधि (जिसमें केवल एक फसल ली जा सकती है)।

  2. गैर-सुखाए जाने योग्य तालाब: 24 महीने की परिवर्तन अवधि आवश्यक होगी।

💡 किसानों के सामने मुख्य चुनौतियां

यद्यपि जैविक मछली का बाजार अत्यंत लाभदायक और विशाल है, लेकिन शुरुआती चरण में किसानों के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां होंगी:

  1. प्रमाणित जैविक चारे (Organic Feed) की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

  2. प्रमाणन और निरीक्षण (Certification Cost) की लागत को कम करना।

  3. सामान्य मछलियों की तुलना में बाजार में बेहतर और प्रीमियम मूल्य प्राप्त करना।

केंद्र सरकार की यह SOP सिक्किम के सोरेंग क्लस्टर को देश का पहला मॉडल जैविक मत्स्य पालन केंद्र बनाने और भारतीय किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।

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