
टेलीग्राम बैन पर आर-पार: भारत सरकार के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी; सीईओ बोले- ’15 करोड़ भारतीयों को क्यों दे रहे सजा?’
नई दिल्ली: नीट-यूजी 2026 री-एग्जाम से ठीक पहले केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के एक कड़े फैसले ने देश के डिजिटल और कानूनी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। भारत सरकार द्वारा टेलीग्राम ऐप पर लगाए गए 24 घंटे के अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ टेलीग्राम कंपनी सीधे दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) पहुंच गई है।
टेलीग्राम ने सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत से तुरंत सुनवाई (Urgent Hearing) की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है। बता दें कि एनटीए की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने यह अभूतपूर्व कदम उठाया है, जिसके बाद गूगल और एप्पल ने भी टेलीग्राम को अपने ऐप स्टोर से हटा दिया है।
आखिर क्यों लगाया गया टेलीग्राम पर प्रतिबंध?
केंद्र सरकार और एनटीए ने देश की साख और मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाया है:
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पेपर लीक और नकल नेटवर्क पर चोट: केंद्र सरकार के मुताबिक, यह अस्थायी प्रतिबंध परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्रों के लीक होने, सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने और संगठित नकल करने वाले रैकेटों (Cheating Networks) को पूरी तरह बंद करने के लिए लगाया गया है।
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मैसेज एडिटिंग फीचर पर भी रोक: सरकार ने टेलीग्राम को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह आगामी 30 जून 2026 तक भारत में अपने ‘मैसेज एडिटिंग फीचर’ (संदेशों को बदलने की सुविधा) को पूरी तरह से बंद रखे।
NTA का सनसनीखेज दावा: टेलीग्राम के फीचर से तैयार हुए ‘फर्जी’ पेपर लीक के सबूत
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कोर्ट और सरकार के सामने टेलीग्राम के दुरुपयोग को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है:
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टाइमस्टैम्प का खेल: एनटीए का दावा है कि टेलीग्राम के ‘मैसेज एडिटिंग फीचर’ का गलत इस्तेमाल करके फर्जी ‘पेपर लीक’ के सबूत तैयार किए गए थे। सॉल्वर गैंग के लोग परीक्षा खत्म होने के बाद पुराने संदेशों को एडिट (संपादित) कर देते थे और उसमें असली प्रश्न पत्र डाल देते थे, जिससे उसका पुराना टाइमस्टैम्प (तारीख और समय) वैसा ही बरकरार रहता था। इससे ऐसा भ्रम फैला कि पेपर परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था।
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लाखों का खेल: एनटीए के अनुसार, ये दोनों ही कड़े उपाय उन शातिर गिरोहों से निपटने के लिए किए गए हैं जो प्रश्न पत्र लीक करने का झूठा दावा करते हैं और डॉक्टर बनने की चाहत रखने वाले सीधे-साधे मेडिकल छात्रों से पहले से हल किए गए प्रश्न पत्र देने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करते हैं। टेलीग्राम बैन पर आर-पार: भारत सरकार के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी; सीईओ बोले- ’15 करोड़ भारतीयों को क्यों दे रहे सजा?’
टेलीग्राम के CEO पावेल ड्यूरोव का पलटवार-‘यह मूल समस्या का समाधान नहीं’
भारत सरकार के इस एक्शन से टेलीग्राम के ग्लोबल सीईओ पावेल ड्यूरोव (Pavel Durov) बेहद भड़क गए हैं और उन्होंने इसकी कड़ी आलोचना की है:
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15 करोड़ यूजर्स प्रभावित: पावेल ड्यूरोव ने तर्क दिया, “सरकार का यह फैसला जमीनी और मूल समस्या (NTA की सुरक्षा चूक) का समाधान किए बिना देश के लाखों-करोड़ों आम यूजर्स को प्रभावित करता है। कुछ नकल माफियाओं की वजह से भारत के 15 करोड़ से ज्यादा सामान्य टेलीग्राम यूजर्स को सजा दी जा रही है, जो बिल्कुल गलत है।”
छात्र और अभिभावक आमने-सामने, VPN का डर बरकरार
इस बड़े डिजिटल प्रतिबंध पर देश के छात्र संगठन और अभिभावक दो धड़ों में बंट गए हैं:
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एक तरफ जहां कई छात्र संगठनों और माता-पिता ने परीक्षा की सुरक्षा के लिए सरकार के इस कड़े कदम का स्वागत किया है।
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वहीं दूसरी तरफ, तकनीकी जानकारों और कुछ छात्रों का कहना है कि इस बैन का जमीनी असर बहुत सीमित रहेगा, क्योंकि सॉल्वर गैंग के लोग VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) के जरिए इस प्रतिबंध को आसानी से बायपास कर टेलीग्राम का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। अब देखना होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट इस पूरे डिजिटल विवाद पर क्या फैसला सुनाता है।








