गर्भ से कोर्ट तक की लड़ाई: समाज से टकराई, आखिर प्यार और मां की जिद दोनों जीते
गर्भ से कोर्ट तक की लड़ाई: समाज से टकराई, आखिर प्यार और मां की जिद दोनों जीते
गर्भ से कोर्ट तक की लड़ाई: समाज से टकराई, आखिर प्यार और मां की जिद दोनों जीते। बिहार के Aurangabad की एक युवती की कहानी इन दिनों चर्चा में है, जिसने प्यार और अपनी बेटी के हक के लिए समाज और हालात दोनों से लड़ाई लड़ी।
गर्भ से कोर्ट तक की लड़ाई: समाज से टकराई, आखिर प्यार और मां की जिद दोनों जीते
युवती और एक युवक के बीच प्रेम संबंध था, लेकिन परिवार के विरोध के चलते मामला बढ़ गया। दोनों दिल्ली भाग गए, जिसके बाद परिजनों ने युवक के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कराया। पुलिस ने दोनों को बरामद किया और युवक जेल चला गया, जबकि युवती घर लौट आई।
इसी दौरान युवती को पता चला कि वह गर्भवती है। समाज के दबाव के बावजूद उसने बच्चे को जन्म देने का फैसला किया और अपनी बेटी के भविष्य के लिए संघर्ष शुरू किया।
युवती ने कोर्ट में प्रेमी की रिहाई के लिए गुहार लगाई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मानवीय रुख अपनाते हुए कहा कि यदि दोनों परिवार शादी के लिए सहमत हों तो युवक को जमानत दी जा सकती है।
करीब आठ महीने बाद युवक को जमानत मिली और दोनों ने कोर्ट परिसर में ही शादी कर ली। इस दौरान उनकी 9 महीने की बेटी भी मौजूद रही, जो इस खास पल की गवाह बनी।
यह कहानी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक मां के हौसले, संघर्ष और अपनी संतान के अधिकार के लिए लड़ाई की मिसाल बन गई है।