यमन से मिसाइल अटैक के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, वैश्विक व्यापार पर खतरा
यमन से मिसाइल अटैक के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, वैश्विक व्यापार पर खतरा
यमन से मिसाइल अटैक के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, वैश्विक व्यापार पर खतरा
यमन से मिसाइल अटैक के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, वैश्विक व्यापार पर खतरा, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और गंभीर होता दिख रहा है। इजराइल पर यमन से हुए मिसाइल हमले ने अमेरिका–इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव को नई दिशा दे दी है।
यमन से मिसाइल अटैक के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, वैश्विक व्यापार पर खतरा
इजराइली सेना के अनुसार, यमन से दागी गई मिसाइल को पहचान लिया गया है। इस हमले के पीछे हूती विद्रोही बताए जा रहे हैं, जो पहले भी गाजा संघर्ष के दौरान हमास के समर्थन में सक्रिय रहे हैं।
बढ़ सकता है बड़ा टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि हूती विद्रोहियों के सीधे तौर पर शामिल होने से यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। ये विद्रोही लंबी दूरी तक हमला करने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को बाधित करने की क्षमता रखते हैं, जिससे पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ सकती है।
वैश्विक व्यापार के लिए खतरा
सबसे बड़ी चिंता बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे स्वेज नहर तक पहुंचने का अहम रास्ता है।
दुनिया के लगभग 10–15% समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। अगर यह रूट बंद होता है—और साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दबाव बना रहता है—तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है और बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। यमन से हुए इस मिसाइल हमले ने साफ संकेत दे दिया है कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष अब सीमित नहीं रहा। यदि समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।