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Tauktae Cyclone: केरल में तेज बारिश और फ्लैश फ्लड, मौसम विभाग ने जारी किया रेड एलर्ट

21 01 2021 serum institute of india in pune

चक्रवाती तूफान ने केरल में दस्तक दे दी है और वो तेजी से पश्चिमी तट की ओर बढ़ रहा है। केरल में लगातार बारिश हो रही है और कई जगहों पर फ्लैश फ्लड की खबरें मिली हैं। मौसम विभाग ने यहां के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है और प्रशासन ने 308 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है।

भारतीय मौसम विभाग ने चक्रवाती तूफान को लेकर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगले 12 घंटों के दौरान यह तूफान और मजबूत जायेगा।

फिलहाल यह चक्रवाती तूफान उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और 18 मई की सुबह तक इसके गुजरात तट के पास पहुंचने की संभावना है।

अरब सागर के ऊपर बन रहे हवा के कम दबाव के चलते गुजरात, केरल समेत देश के पांच राज्यों पर चक्रवाती तूफान टॉक्टे (Tauktae) का खतरा पैदा हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक यह 16 मई तक देश के पश्चिमी तट से टकरायेगा, जिसके कारण गुजरात और इसके आसपास में तेज बारिश और तूफान की आशंका है। भारी नुकसान की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव के उपाय अभी से शुरू हो गए है। प्रभाव की आशंका वाले पांच राज्यों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के 53 दल तैनात कर दिए गए हैं। प्रत्येक दल में पेड़ व बिजली के खंभे काटने, बोट और बचाव-चिकित्सा के उपकरणों से लैस 40 जवान हैं।

उधर, गुजरात के समुद्री किनारों पर चक्रवात ‘तौकते’ के टकराने की आशंका के चलते वहां खतरे के सिग्नल लगा दिए गए हैं। अमरेली – जाफराबाद बोट एसोसिएशन ने बताया कि अभी भी करीब 700 बोट समुद्र में है तथा उनसे वायरलेस की खराबी के चलते संपर्क नहीं हो पा रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार अरब सागर में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के कारण 16, 17 एवं 18 मई को सौराष्ट्र एवं कच्छ के समुद्री किनारे पर बसे शहरों में भारी बरसात की आशंका है।

18 मई को सौराष्ट्र एवं कच्चे तथा दक्षिण गुजरात के इलाकों में पवन की गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है।

राजकोट में एनडीआरएफ की दो टीमें भेजी गई है तथा एक दर्जन टीमों को स्टैंड बाई रखा है। राज्य सरकार ने समुद्री किनारे पर बसे शहर एवं गांवों को सतर्क कर दिया है साथ ही मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की अपील की गई है।

वलसाड कलेक्टर ने बताया कि करीब 39 गांव में आश्रय स्थल तय किए गए हैं तथा चक्रवात के असर को देखते हुए जरूरत पड़ी तो समुद्री किनारे के प्रभावित गांवों के लोगों को यहां लाया जाएगा।

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