स्विट्जरलैंड की राजदूत ने भारतीय लिबास में खेला गरबा: स्विस एम्बेसडर माया तिस्साफी पर चढ़ा नवरात्र का रंग, 50 हजार लोगों के साथ मनाया जश्न
गांधीनगर / अहमदाबाद: गुजरात में नवरात्र का पर्व अत्यंत उल्लास और सांस्कृतिक भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष का नवरात्र उत्सव उस समय अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया, जब भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी (Maya Tissafi) पारंपरिक भारतीय परिधान में गरबा खेलती नजर आईं।
स्विस राजदूत ने भाजपा सांसद डॉ. हेमंग जोशी द्वारा आयोजित एक विशाल गरबा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और प्रतिभागी के रूप में हिस्सा लिया। इस भव्य आयोजन में करीब 50,000 लोग एक साथ पारंपरिक लोकनृत्य गरबा कर रहे थे।
रंग-बिरंगी लहंगा-चोली में ढोल की थाप पर थिरकीं स्विस राजदूत
राजदूत माया तिस्साफी कार्यक्रम में पूरी तरह से भारतीय संस्कृति के रंगों में रंगी नजर आईं। उन्होंने पारंपरिक गुजराती लहंगा-चोली पहनी हुई थी और आरती पूजन में भाग लेने के बाद आम लोगों के साथ ढोल की थाप पर गरबा और डांडिया खेला।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए स्विस राजदूत ने लिखा:
“कितनी प्रेरणादायक शाम थी, #Navratri की भावना का जश्न। उत्सव गरबा के साथ जारी रहा—गुजरात का पारंपरिक लोकनृत्य जो भक्ति, संस्कृति और समुदाय के जीवंत उत्सव में लोगों को एकजुट करता है। करीब 50,000 लोगों की ऊर्जा और एकता सचमुच उल्लेखनीय थी। यह त्योहार सभी के जीवन में खुशी, समृद्धि और सुख लाए।”
सोशल मीडिया पर ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ की तारीफ
स्विस एम्बेसडर की तस्वीरें और विचार सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। भारतीय यूज़र्स और इंटरनेट समुदाय उनके इस ‘देसी अंदाज’ और भारतीय परंपराओं के प्रति उनके सम्मान की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई विशेषज्ञों और नागरिकों ने इसे ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’ (सांस्कृतिक कूटनीति) का बेहतरीन उदाहरण बताया, जो दो देशों को प्रशासनिक सीमाओं से परे सांस्कृतिक संबंधों से जोड़ता है।
मुख्य बिंदु एक नजर में:
| विवरण | जानकारी |
| विशिष्ट अतिथि | माया तिस्साफी (भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत) |
| आयोजक | डॉ. हेमंग जोशी (भाजपा सांसद) |
| आयोजन स्थल | गुजरात (गरबा महोत्सव) |
| जनभागीदारी | लगभग 50,000 नागरिक |
| मुख्य आकर्षण | पारंपरिक पोशाक में गरबा व आरती में सहभागिता |
गुजरात में नवरात्र का अर्थ केवल उत्सव नहीं, बल्कि देवी दुर्गा की भक्ति और सांस्कृतिक धरोहर का एक महाकुंभ है। अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों की इस प्रकार की सक्रिय भागीदारी से भारत की ‘अतुल्य भारत’ (Incredible India) की छवि और गुजरात का पर्यटन वैश्विक पटल पर और अधिक मजबूत होकर उभर रहा है।










